बारिश के दौरान जिन जगहों पर सुधार किए जाने की बात कही गई थी उनमें से कई स्थानों पर फिर पानी जमा हो गया। हालात इतने खराब हुए कि कुछ जगहों पर सड़क तक बंद करनी पड़ी। 11 अगस्त को हुई बारिश में भी शहर के कई हिस्सों में भारी जलभराव देखने को मिला था। अब समस्या सिर्फ पुराने स्थानों तक सीमित नहीं रही है। इस मानसून के दौरान शहर में जलभराव के 8 नए स्थान भी सामने आए हैं। ट्रैफिक पुलिस इन नए स्पॉट की सूची तैयार कर संबंधित एजेंसियों को भेजने की तैयारी कर रही है।
इस बार किलोल पार्क डिपो चौराहा आरआरएल से एम्स रोड बाणगंगा रानी कमलापति बंसल प्लाजा वीआईपी रोड पर सेल्फी पार्क से पहले और लालघाटी से बैरागढ़ लेफ्ट टर्न तक के क्षेत्र नए जलभराव वाले स्थान के रूप में सामने आए हैं। इन जगहों पर बारिश के दौरान सड़क पर पानी जमा होने से वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई प्रमुख मार्गों पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
पुराने जलभराव वाले स्थानों की स्थिति भी राहत देने वाली नहीं है। गणेश मंदिर तिराहे पर जलभराव रोकने के लिए साइड वर्ज हटाकर पानी की निकासी का रास्ता बनाने की कोशिश की गई थी। इसके बावजूद बारिश के दौरान यहां रास्ता बाधित होने की स्थिति बन गई। अब पीडब्ल्यूडी की ओर से निकासी व्यवस्था को और बेहतर करने का काम किया जा रहा है।
ओल्ड केम्पियन तिराहे पर सड़क का लेवल सुधारने के लिए उसे ऊंचा किया गया और सीसी रोड भी बनाई गई। इसके बावजूद बारिश में यहां पानी जमा हो गया। खटलापुरा मंदिर क्षेत्र में जलभराव रोकने के लिए सड़क का समतलीकरण कराया गया था लेकिन बारिश के बाद यहां भी पानी रुकने की समस्या सामने आई। नर्मदापुरम रोड की सर्विस रोड पर गड्ढे भरने सहित कई सुधार कार्य किए गए थे लेकिन बारिश के दौरान यहां भी पानी की निकासी ठीक नहीं रही।
बैरागढ़ क्षेत्र की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। ईसाइ कब्रिस्तान से सीहोर नाके तक सड़क के दोनों तरफ 150 से अधिक बड़े गड्ढे होने की बात सामने आई है। इन गड्ढों को भरने का दावा भी किया गया था लेकिन बारिश के बाद सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आया। जलभराव के साथ सड़क पर गड्ढे होने से वाहन चालकों के लिए हादसे का खतरा और बढ़ जाता है।
ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि पिछले साल चिह्नित किए गए 35 स्थानों की सूची संबंधित एजेंसियों को दी गई थी और इनमें अधिकांश जगहों पर सुधार कार्य किए गए हैं। इस बारिश में सामने आए 8 नए स्थानों की सूची भी संबंधित विभागों को भेजी जाएगी। वहीं नगर निगम का कहना है कि इन स्थानों पर जलभराव के बजाय जल रुकाव की समस्या है और इसका समाधान किया जा रहा है। विभाग से जुड़े स्थानों पर सुधार कार्य किए जाने की बात भी कही गई है।
हालांकि लगातार सामने आ रही तस्वीरें यह सवाल जरूर खड़ा करती हैं कि अगर सुधार कार्य किए जा चुके हैं तो मामूली बारिश में कई स्थानों पर दोबारा पानी क्यों भर रहा है। भोपाल जैसे बड़े शहर में जलभराव सिर्फ यातायात की समस्या नहीं बल्कि सड़क सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं से भी जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में नए स्पॉट के साथ पुराने स्थानों की निकासी व्यवस्था की भी दोबारा जांच जरूरी हो गई है ताकि हर बारिश में वही समस्या दोबारा खड़ी न हो।
