हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने गरबा पंडालों के प्रवेश को लेकर भी एक सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि पंडाल के प्रवेश द्वार पर भगवान विष्णु के वराह अवतार की प्रतिमा स्थापित की जाए। उनके मुताबिक प्रवेश से पहले वराह भगवान का पूजन कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही पंचगव्य ग्रहण कराने की बात भी कही गई है। समिति का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य गरबा आयोजन को धार्मिक परंपराओं से जोड़ना और उसकी पवित्रता बनाए रखना है।
तिवारी ने बताया कि पंचगव्य में गाय का दूध दही घी गोबर और गोमूत्र शामिल होता है। उन्होंने दावा किया कि पंचगव्य ग्रहण करने से शुद्धिकरण होता है और इसके जरिए गरबा स्थल पर विधर्मियों के प्रवेश को रोका जा सकेगा। यह बयान सामने आने के बाद गरबा आयोजनों में प्रवेश व्यवस्था और आयोजन के स्वरूप को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
समिति ने गरबा आयोजकों से अपील की है कि वे नवरात्रि के दौरान होने वाले कार्यक्रमों को धार्मिक और पारंपरिक तरीके से आयोजित करें। आयोजकों से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने नियमित आरती कराने और धार्मिक गीतों के साथ गरबा आयोजित करने पर जोर दिया गया है। समिति की ओर से यह भी कहा गया है कि कार्यक्रम के दौरान ऐसी गतिविधियों से बचा जाए जो धार्मिक भावनाओं या आयोजन की मर्यादा के विपरीत हों।
चंद्रशेखर तिवारी ने यह भी कहा कि यदि आयोजक इन बातों का ध्यान नहीं रखते हैं तो समिति को कार्रवाई के लिए बाध्य होना पड़ सकता है। नवरात्रि नजदीक आने के साथ ही भोपाल में गरबा आयोजनों की तैयारियां तेज हो गई हैं और ऐसे में समिति की इस अपील के बाद आयोजकों की व्यवस्थाओं पर नजर रहने की संभावना है। अब देखना होगा कि गरबा आयोजक इन सुझावों को किस तरह अपनाते हैं और आगामी नवरात्रि में शहर के गरबा पंडालों में धार्मिक परंपराओं और आयोजन व्यवस्था का स्वरूप कैसा रहता है।
