टीम ने मामले की पड़ताल के लिए अशोक बुद्ध विहार मठ पहुंचकर वहां मौजूद भंते कश्यप आनंद से बातचीत की। भंते के मुताबिक उन्हें मठ के पते का इस्तेमाल कर पासपोर्ट बनाए जाने की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि वह मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं और करीब दो दिन पहले ही मठ में आए हैं। उनके आने के बाद अब तक न STF की टीम जांच के लिए मठ पहुंची और न ही किसी दूसरी जांच एजेंसी ने उनसे इस मामले में पूछताछ की है।
भंते कश्यप आनंद ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि मठ के पते से कितने लोगों के पासपोर्ट बनाए गए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने मठ का पता देकर पासपोर्ट के लिए आवेदन किया होगा तो नियमानुसार पुलिस को पते का सत्यापन करना चाहिए था। हालांकि उनकी जानकारी में ऐसा कोई पुलिस वेरिफिकेशन नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार वह भोजन के लिए मठ से बाहर चले जाते हैं इसलिए उनकी गैरमौजूदगी में कोई टीम आई हो इसकी संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन मठ में मौजूद किसी अन्य व्यक्ति ने भी उन्हें ऐसी किसी कार्रवाई की जानकारी नहीं दी।
यही बात अब STF की जांच को और गंभीर बना रही है। अगर जांच एजेंसी के मुताबिक एक ही मठ के पते से 40 से ज्यादा पासपोर्ट बने हैं तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि इन आवेदनों में दिए गए दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई। पुलिस वेरिफिकेशन में आवेदकों की पहचान और उनके वास्तविक निवास की पुष्टि कैसे की गई। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि मठ का पता पासपोर्ट आवेदनों में किसने उपलब्ध कराया और इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा था।
इस पूरे मामले की शुरुआत डबरा के सिमरिया टेकरी स्थित बौद्ध विहार के पते से सामने आए संदिग्ध पासपोर्ट से हुई थी। जांच आगे बढ़ी तो मध्य प्रदेश के अलग अलग स्थानों के पतों से करीब 70 संदिग्ध पासपोर्ट बनाए जाने की जानकारी सामने आई। STF के मुताबिक इनमें 22 मामलों की पुष्टि हो चुकी है जबकि बाकी मामलों की जांच जारी है। जांच में फर्जी आधार कार्ड वोटर आईडी निवास प्रमाण पत्र और 10वीं की अंकसूची जैसे दस्तावेजों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।
STF ने मामले में रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार रियाल कई पासपोर्ट में गवाह बना था और उसके नाम से भी चार पासपोर्ट मिलने की जानकारी सामने आई है। आरोपियों के कनेक्शन असम समेत दूसरे राज्यों से जुड़े होने की बात कही जा रही है। STF अब इस मामले में संभावित अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की दिशा में भी जांच कर रही है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मठ के एक पते से 40 से ज्यादा पासपोर्ट जारी होने के बावजूद सत्यापन प्रक्रिया में यह असामान्य स्थिति पकड़ में क्यों नहीं आई। अब STF पासपोर्ट आवेदन से लेकर दस्तावेज तैयार होने और पुलिस वेरिफिकेशन के बाद पासपोर्ट जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच से यह साफ होने की उम्मीद है कि मठ का पता किसने इस्तेमाल किया दस्तावेज कहां तैयार हुए और इतनी बड़ी संख्या में पासपोर्ट जारी होने के पीछे असली नेटवर्क कितना बड़ा है।
