बालाघाट के जंगलों में बसे अड़ोरी कुंडेकसा बोंदारी और आसपास के गांवों में स्वास्थ्य विभाग ने जांच और उपचार के लिए अस्थायी कैंप लगाए हैं। कुंडेकसा के स्कूल में बने स्वास्थ्य केंद्र में रोज बड़ी संख्या में बच्चे पहुंच रहे हैं। कई बच्चों के शरीर पर दाने और फफोले दिखाई दिए। रजिस्टर के मुताबिक एक दिन में 26 और अगले दिन सुबह तक 15 बच्चों के नाम दर्ज किए गए। स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार अलग-अलग केंद्रों पर रोज करीब 60 प्रभावित बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग भी कर रही हैं। बिरसा ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर के अनुसार रोज 100 से 150 घरों में पहुंचकर बच्चों की जांच की जा रही है। प्रभावित क्षेत्र में करीब 18 से 20 गांवों को प्रमुख रूप से चिन्हित किया गया है। कुंडेकसा के अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र में दो बेड और चार गद्दों की व्यवस्था है। मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण कई बच्चों का इलाज जमीन पर गद्दे बिछाकर किया जा रहा है। कुछ बच्चों को खिड़की से सलाइन की बोतलें लटकाकर उपचार दिया जा रहा है।
बीमारी के साथ इन गांवों में बुनियादी सुविधाओं का संकट भी सामने आया है। कई बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र आधार और समग्र आईडी तक नहीं बनी थी। अब प्रशासन ने स्वास्थ्य कैंप के साथ दस्तावेज बनाने की व्यवस्था भी शुरू की है। ग्रामीण महिलाओं ने गर्भावस्था के दौरान पोषण आहार नहीं मिलने और बच्चों के टीकाकरण में कमी की शिकायत की है। बोंदारी गांव में आज भी कुछ परिवार नाले का पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के मुताबिक घरों तक पर्याप्त साफ पानी नहीं पहुंचता।
मृत बच्चों के परिजनों ने भी स्वास्थ्य सुविधाओं और पोषण व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। एक पिता ने बताया कि उनके पांच साल के बेटे की हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सुधार नहीं होने पर गोंदिया के निजी अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। एक अन्य बच्चे को 10 सितंबर को अस्पताल से स्वस्थ बताकर डिस्चार्ज किया गया लेकिन घर लौटने के बाद उसे फिर तेज बुखार आने लगा।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 37 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और करीब साढ़े चार हजार लोगों का उपचार किया गया है। 56 स्वास्थ्य टीमें करीब 200 कर्मचारियों और 40 डॉक्टरों के साथ काम कर रही हैं। 490 बच्चों को उपचार के बाद घर भेजा जा चुका है जबकि 57 बच्चे अभी भर्ती बताए गए हैं।
जांच में 101 मीजल्स सैंपल में 32 पॉजिटिव मिले हैं। मलेरिया के लिए भेजे गए 64 सैंपल में 50 पॉजिटिव पाए गए। डेंगू के 28 सैंपल में दो और चिकनगुनिया का एक सैंपल पॉजिटिव मिला। पानी के 14 सैंपल में पांच के परिणाम पॉजिटिव आए और अधिकारियों के मुताबिक नाले के पानी में एडिनोवायरस मिला है। प्रशासन का कहना है कि मौतों को किसी एक बीमारी से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। मलेरिया उल्टी-दस्त और कुपोषण जैसे कई कारक भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
फिलहाल प्रभावित मुख्य क्षेत्र में मीजल्स टीकाकरण रोककर आसपास के क्षेत्रों में अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति सामान्य होने पर प्रभावित क्षेत्र में भी टीकाकरण शुरू किया जाएगा। दूसरी ओर ग्रामीणों की शिकायतें यह सवाल जरूर खड़ा कर रही हैं कि बीमारी के साथ स्वास्थ्य पोषण पानी और टीकाकरण जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी ने हालात को कितना प्रभावित किया है।
