जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 1:30 बजे मिल परिसर से अचानक धुआं उठता दिखाई दिया। कर्मचारियों ने जब तक स्थिति को समझा, तब तक आग तेजी से फैल चुकी थी। रूई जैसी अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री होने के कारण आग ने विकराल रूप ले लिया। हालात बिगड़ते देख तत्काल मिल की बिजली सप्लाई बंद की गई और दमकल विभाग को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही बड़वाह और ओंकारेश्वर से दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। इसके साथ ही सनावद नगर परिषद का पानी का टैंकर भी आग बुझाने में लगाया गया। दमकल कर्मियों और स्थानीय प्रशासन की टीम ने लगातार करीब चार घंटे तक मशक्कत की, जिसके बाद आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि शाम करीब 6 बजे तक परिसर से धुआं निकलता रहा, जिससे आसपास के लोगों में दहशत का माहौल बना रहा।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल भी मौके पर पहुंच गए। तहसीलदार केसी सोलंकी, सीएमओ राजेंद्र मिश्रा और नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि इंदर बिरला ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया। अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगातार निगरानी बनाए रखी।
मिल प्रबंधक धर्मेंद्र मित्तल ने बताया कि शॉर्ट सर्किट के बाद आग ने अचानक तेजी पकड़ ली। शुरुआत में कर्मचारियों ने मिल के अगले हिस्से में लगी आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक लपटें पीछे के हिस्से तक पहुंच चुकी थीं। उन्होंने बताया कि फिलहाल नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
गनीमत रही कि इस हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन बड़ी मात्रा में सामग्री जलकर खाक हो गई। आग की इस घटना ने औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा व्यवस्था और फायर सेफ्टी इंतजामों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
