निरीक्षण के दौरान तीन गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों का मामला सामने आया जिन्हें अब तक न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर में भर्ती नहीं कराया गया था। इस पर कलेक्टर ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे सभी बच्चों को बिना देरी के NRC में भर्ती कराया जाए ताकि उनका उचित इलाज और पोषण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुपोषण जैसी गंभीर समस्या को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसी क्रम में राशन वितरण प्रणाली की भी जांच की गई जहां एक दुकान में स्टॉक में गड़बड़ी पाई गई। इस अनियमितता को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने फूड इंस्पेक्टर और समिति प्रबंधक को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली गरीबों के जीवन से जुड़ी योजना है और इसमें किसी भी तरह की हेराफेरी सीधे तौर पर जरूरतमंदों के अधिकारों का हनन है।
इसके अलावा खाद्यान्न पर्ची के लंबित आवेदनों को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई और पंचायत सचिव को नोटिस देने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि सभी लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ मिल सके।
महिला स्व सहायता समूहों के संदर्भ में भी उन्होंने विशेष जोर दिया और कहा कि समूहों को केवल योजनाओं तक सीमित न रखकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं। उन्होंने उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग और आय बढ़ाने के लिए नवीन उपाय अपनाने की बात कही जिससे ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
शाहपुर क्षेत्र में किए गए इस निरीक्षण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन अब योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर पूरी तरह सतर्क और सख्त है। कलेक्टर ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी योजना में लापरवाही अब किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी और जिम्मेदारों पर सीधे कार्रवाई होगी। यह सख्ती न केवल सिस्टम को सुधारने का प्रयास है बल्कि यह भी संकेत है कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रशासन पूरी गंभीरता से काम कर रहा है।
