विदेश मंत्री अराघची ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से आरोप लगाया कि व्हाइट हाउस और ईरान के बीच बातचीत को लेकर अलग-अलग संकेत दिए जा रहे हैं, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि हजारों अमेरिकी सैनिक मध्य-पूर्व क्षेत्र की ओर तैनात किए जा रहे हैं, जिससे तनाव और बढ़ने की आशंका है। उनके अनुसार, यदि किसी स्तर पर युद्धविराम की कोशिश सफल भी होती है, तो यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका और इजरायल इस संघर्ष के अंतिम परिणाम को लेकर समान दृष्टिकोण रखते हैं या नहीं।
अराघची ने अपने बयान में यह भी कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष के एक महीने बाद अब दुनिया भर की सरकारें इसके राजनीतिक और आर्थिक प्रभावों का आकलन करने में जुटी हैं। उनके अनुसार, यह स्थिति केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि वहां से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ेगा।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा रही है। ईरान का दावा है कि कुछ हालिया सैन्य गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन हैं। ईरानी पक्ष का कहना है कि वह इन कार्रवाइयों को गंभीरता से देख रहा है और आवश्यक प्रतिक्रिया देने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
मध्य-पूर्व में स्थिति उस समय और संवेदनशील हो गई जब होर्मुज क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आईं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई थी और इसका उद्देश्य अपने सैनिकों और नौसैनिक इकाइयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। वहीं ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे आक्रामक कदम बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप से क्षेत्र में कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और सभी पक्षों की नजर आगामी घटनाक्रम पर टिकी हुई है।
