वॉशिंगटन। अमेरिका ने ईरान की सैन्य सप्लाई चेन पर कार्रवाई करते हुए ईरान, हॉन्ग-कॉन्ग और पाकिस्तान से जुड़े 10 लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने मंगलवार को यह कदम उठाया। इन लोगों और कंपनियों पर ईरान के रक्षा मंत्रालय के लिए हथियार और उनके कलपुर्जे जुटाने तथा सैन्य खरीद में आर्थिक मदद पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब ट्रंप प्रशासन ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है। वहीं, दोनों देशों के बीच संभावित कूटनीतिक बातचीत को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत कार्रवाई
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, यह कार्रवाई प्रशासन के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य ईरानी सरकार तक पहुंचने वाली महत्वपूर्ण वित्तीय मदद को रोकना है।
ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि उनका विभाग ईरानी शासन को किसी भी तरह का समर्थन बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान की मदद करने वाले लोगों और संस्थाओं की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की कार्रवाई जारी रहेगी।
हथियारों और कलपुर्जों की खरीद में मदद का आरोप
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, प्रतिबंधों की जद में आए 10 लोग और संस्थाएं ईरान, हॉन्ग-कॉन्ग और पाकिस्तान में मौजूद हैं। इन पर ईरान के रक्षा मंत्रालय के लिए हथियार तथा हथियारों के हिस्से जुटाने में मदद करने का आरोप है।
अमेरिका का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की रक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ाना और उसकी हथियार निर्माण क्षमता को दोबारा मजबूत करने की कोशिशों को रोकना है। नए प्रतिबंधों के जरिए उन लोगों और कंपनियों की लागत बढ़ाने का प्रयास किया गया है, जिन्होंने ईरान की सैन्य खरीद में मदद की।
2024 में भी हुई थी कार्रवाई
ईरान की सैन्य क्षमता से जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ अमेरिका पहले भी कार्रवाई कर चुका है। वर्ष 2024 में बाइडेन प्रशासन ने ईरान के रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के लिए मिसाइल और ड्रोन बनाने तथा उनके प्रसार में मदद करने वाली संस्थाओं को प्रतिबंधों के दायरे में लिया था।
रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रियाल
अमेरिका की ताजा वित्तीय कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब मंगलवार को ईरान की मुद्रा रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। तेहरान में कारोबारियों ने एक अमेरिकी डॉलर के बदले 25 लाख से अधिक रियाल में कारोबार किया। युद्ध शुरू होने के बाद से रियाल लगातार कमजोर हुआ है। इससे पहले दो सितंबर को यह 22 लाख रियाल प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंचा था।
पहले से प्रतिबंधों के दबाव में ईरानी अर्थव्यवस्था
ईरानी अर्थव्यवस्था पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दबाव में है। इस साल अमेरिका की ओर से ईरानी तेल पर नौसैनिक नाकाबंदी और युद्ध शुरू होने के बाद लगाए गए नए प्रतिबंधों ने आर्थिक स्थिति पर दबाव और बढ़ा दिया है। ताजा अमेरिकी कार्रवाई ईरान की सैन्य आपूर्ति और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने के प्रयास के तौर पर सामने आई है।
