पहले भी कर चुके हैं होर्मुज को लेकर दावा
ट्रंप इससे पहले भी होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र बताए जाने की बात कह चुके हैं। उन्होंने 18 अगस्त को भी इसी तरह का मैप शेयर किया था और कहा था कि जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिकी इलाका घोषित किया जाएगा। इससे पहले 14 अगस्त को लॉन्ग आइलैंड में ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज को अपना क्षेत्र घोषित करेगा।
ईरान ने ट्रंप के इस दावे को खारिज किया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसिन रेज़ाई ने अमेरिकी दावे पर तंज कसते हुए कहा था कि होर्मुज को दोबारा खोल पाने में अमेरिका की नाकामी और उस पर मालिकाना हक जताने के दावे के बीच की दूरी, वॉशिंगटन और होर्मुज के बीच की दूरी से भी ज्यादा है।
ईरान पर नए प्रतिबंधों की तैयारी
ट्रंप का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ईरान के खिलाफ नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों की घोषणा कर सकते हैं। उन्होंने चीन से भी तेहरान के तेल निर्यात को लेकर अमेरिका का सहयोग करने की अपील की है।
चीन ईरानी तेल का बड़ा खरीदार है। ऐसे में नए अमेरिकी प्रतिबंधों का असर सिर्फ ईरान तक सीमित रहने के बजाय उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर भी पड़ सकता है।
ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को बताया गैरकानूनी
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंधों की आलोचना की है। उनका आरोप है कि अमेरिका अपनी सीमाओं से बाहर भी अपने अधिकार थोपने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि सेकेंडरी प्रतिबंधों का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है।
मोहसिन रेज़ाई ने पड़ोसी देशों को भी अमेरिकी आर्थिक अभियान का समर्थन नहीं करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जो देश अमेरिका के आर्थिक युद्ध में शामिल होंगे, ईरान उन्हें दुश्मन मानेगा।
ट्रंप-ईरान के बीच नहीं थमा तनाव
ट्रंप लगातार दूसरे देशों से ईरान को आर्थिक मदद या व्यापारिक रास्ता उपलब्ध नहीं कराने की अपील कर रहे हैं। उनका जोर इस बात पर है कि तेहरान को अमेरिका के मुताबिक समझौते की शर्तें स्वीकार करनी चाहिए।
वहीं, ईरान भी अपने रुख पर कायम है। हालांकि, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने टकराव खत्म करने के लिए कूटनीतिक समाधान की बात कही है। उनका कहना है कि ईरान अपनी ताकत और सम्मान बनाए रखते हुए संघर्ष को खत्म करने का रास्ता तलाशना चाहता है।
होर्मुज को लेकर दोनों देशों के सख्त रुख के बीच अब तनाव और बढ़ने की आशंका है। खासकर नए अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरानी तेल व्यापार पर दबाव बढ़ने से यह विवाद आर्थिक मोर्चे पर भी गंभीर रूप ले सकता है।
