अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम के नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित करते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हालिया बातचीत में बोइंग समझौता प्रमुख विषयों में शामिल रहा। उन्होंने इसे दोनों देशों के बढ़ते आर्थिक रिश्तों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि अमेरिका इस समझौते को जल्द अंतिम रूप तक पहुंचाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है।
गोर ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि दुनिया के विभिन्न देश अत्याधुनिक और उच्च गुणवत्ता वाले विमानों का उपयोग करें तथा बोइंग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत के साथ प्रस्तावित नया समझौता दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक और औद्योगिक सहयोग का मजबूत आधार बनेगा। उनके अनुसार अमेरिका भारत को केवल एक व्यापारिक साझेदार नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक आर्थिक सहयोगी के रूप में देखता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से उभरती हुई शक्ति बन चुका है और अमेरिका इस विकास यात्रा का सहभागी बनना चाहता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत तकनीक, विमानन, रक्षा और अन्य आधुनिक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उनका कहना था कि दोनों देशों की क्षमताओं का समन्वय भविष्य में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को नई दिशा दे सकता है।
निवेश के मुद्दे पर बोलते हुए अमेरिकी राजदूत ने कहा कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने इस वर्ष अमेरिका में निवेश आकर्षित करने के मामले में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि लगभग 20.5 अरब डॉलर के नए निवेश को बढ़ावा देने में दूतावास की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके अनुसार यह उपलब्धि भारत में कार्यरत अमेरिकी कंपनियों के बढ़ते विश्वास और स्थिर कारोबारी वातावरण का परिणाम है।
गोर ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां भारत में निवेश से पहले बौद्धिक संपदा की सुरक्षा, नियामकीय स्थिरता और कारोबारी माहौल जैसे विषयों पर जानकारी प्राप्त करती हैं। उन्होंने कहा कि भारत के प्रति बढ़ते भरोसे ने निवेशकों का विश्वास मजबूत किया है और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध लगातार गहरे हो रहे हैं। उन्होंने उद्योग जगत को भरोसा दिलाया कि यदि किसी व्यावसायिक परियोजना के दौरान प्रशासनिक या प्रक्रियागत कठिनाइयां आती हैं तो अमेरिकी दूतावास हर संभव सहयोग के लिए उपलब्ध रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप विदेशी बाजारों में अमेरिकी कंपनियों के हितों को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार यदि किसी व्यावसायिक समझौते से अमेरिका में रोजगार के अवसर पैदा होते हैं तो राष्ट्रपति स्वयं भी उस दिशा में पहल करने से पीछे नहीं हटते। इससे स्पष्ट होता है कि अमेरिकी प्रशासन अंतरराष्ट्रीय आर्थिक साझेदारियों को रोजगार और औद्योगिक विकास से जोड़कर देख रहा है।
भारत आज दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल है और आने वाले वर्षों में हजारों नए विमानों की आवश्यकता का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में प्रस्तावित बोइंग समझौता केवल विमान खरीद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में निवेश, तकनीक, रक्षा, ऊर्जा, एयरोस्पेस और औद्योगिक सहयोग के नए अवसर भी पैदा कर सकता है। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है, जिसके लिए व्यापक आर्थिक सहयोग को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।
