जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार, भूकंप रिक्टर पैमाने पर 7.1 तीव्रता का था। झटके इतने तेज थे कि कुमामोटो सहित आसपास के कई क्षेत्रों में इमारतें हिलने लगीं और लोग घरों तथा कार्यालयों से बाहर निकल आए। प्रारंभिक आकलन के अनुसार समुद्र में लगभग एक मीटर ऊंची लहरें उठने की आशंका जताई गई है, जिसके चलते तटीय क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
भूकंप के तुरंत बाद जापान सरकार ने इमरजेंसी भूकंप चेतावनी प्रणाली सक्रिय कर दी। इसके तहत दक्षिणी क्यूशू द्वीप के कई प्रांतों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया गया। कुमामोटो के अलावा नागासाकी, कागोशिमा, फुकुओका, सागा, ओइता और मियाज़ाकी प्रांतों में प्रशासन ने लोगों से आधिकारिक निर्देशों का पालन करने और समुद्र तटों से दूर रहने की अपील की है।
सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। राहत और बचाव दलों को भी तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।
जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। देश प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटें आपस में मिलती हैं। इसी कारण यहां समय-समय पर मध्यम और तेज तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। जापान ने वर्षों के अनुभव के आधार पर उन्नत भूकंप चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन तंत्र विकसित किया है, जिससे लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े भूकंप के बाद कुछ समय तक आफ्टरशॉक आने की संभावना बनी रहती है। इसी कारण प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने तटीय इलाकों में रहने वाले नागरिकों से समुद्र के किनारे जाने से बचने और जरूरत पड़ने पर ऊंचे एवं सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का आग्रह किया है।
फिलहाल प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। भूकंप के बाद विभिन्न सरकारी एजेंसियां नुकसान का आकलन करने में जुटी हैं। साथ ही परिवहन, संचार और अन्य आवश्यक सेवाओं की स्थिति की भी समीक्षा की जा रही है। यदि स्थिति में कोई नया बदलाव होता है तो संबंधित अधिकारियों द्वारा समय-समय पर नई जानकारी जारी की जाएगी। अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देते हुए सभी संबंधित विभाग अलर्ट मोड पर काम कर रहे हैं।
