बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हर परिस्थिति में UAE के साथ खड़ा है और दोनों देश आने वाले समय में हर क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे। बातचीत में पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति पर भी चिंता जताई गई, जहां दोनों नेताओं ने संयम और संवाद को ही समाधान बताया।
इस दौरे को लेकर सबसे अहम घटनाक्रम में दोनों देशों के बीच ऊर्जा और निवेश से जुड़े कई समझौते हुए। LPG सप्लाई, स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व, रक्षा सहयोग और वडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर जैसे क्षेत्रों में MoU साइन किए गए। रिपोर्ट्स के अनुसार UAE ने भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर, RBL बैंक और सम्मान कैपिटल में लगभग 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा भी की है।
इसके अलावा UAE ने अपनी क्रूड ऑयल उत्पादन क्षमता को 2027 तक 50 लाख बैरल प्रतिदिन तक बढ़ाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस कदम को वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अहम माना जा रहा है। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में यह दौरा भारत-UAE रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा।
भारत और UAE के बीच पहले से ही गहरा व्यापारिक संबंध है। UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है और दोनों देशों के बीच 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होता है। भारत पेट्रोलियम प्रोडक्ट, जेम्स-ज्वेलरी, टेक्सटाइल, फूड आइटम, मशीनरी और केमिकल्स का बड़ा निर्यातक है।
कुल मिलाकर यह दौरा ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ता नजर आ रहा है।
