मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शुक्रवार रात ऑल पाकिस्तान गुड्स ट्रांसपोर्ट इत्तेहाद के प्रतिनिधियों और संघीय संचार मंत्री अलीम खान के बीच लंबी बातचीत हुई लेकिन दोनों पक्षों के बीच किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी। बातचीत बेनतीजा रहने के बाद ट्रांसपोर्टरों ने अपनी सेवाएं बंद करने का फैसला किया और बड़ी संख्या में कमर्शियल मालवाहक वाहनों को सड़कों से हटाकर निर्धारित पार्किंग स्थानों पर खड़ा कर दिया गया।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि वे लंबे समय से सरकार के सामने अपनी समस्याएं रखते आ रहे हैं लेकिन उनकी मांगों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। ऑल पाकिस्तान गुड्स ट्रांसपोर्ट ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद ओवैस चौधरी ने कहा कि सरकार के सामने सभी जायज समस्याएं रखी गईं लेकिन बातचीत से कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि जब तक मांगों को स्वीकार नहीं किया जाता तब तक देशव्यापी विरोध जारी रहेगा।
इस हड़ताल में सिर्फ सामान्य मालवाहक वाहन ही शामिल नहीं हैं बल्कि खाद्य तेल के टैंकर पेट्रोलियम टैंकर भारी ट्रक ट्रेलर और अन्य इंटरसिटी कमर्शियल मालवाहक वाहन भी शामिल हैं। ऐसे में हड़ताल लंबी खिंचती है तो पाकिस्तान की सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
ट्रांसपोर्टरों की सबसे प्रमुख मांगों में एक्सल लोड और वाहन क्षमता से जुड़े नियमों में एकरूपता शामिल है। उनका कहना है कि पूरे देश में एक्सल लोड नियम समान रूप से लागू किए जाएं और 10 पहियों वाले वाहनों को 35 टन तक माल ले जाने की अनुमति दी जाए। इसके अलावा डीजल की बढ़ती कीमतों में राहत मोटरवे टोल टैक्स कम करने और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को विदहोल्डिंग टैक्स में राहत देने की मांग भी की गई है।
ट्रांसपोर्टर कस्टम कानूनों के तहत वाहनों की जब्ती के नियमों में बदलाव और हाईवे पर लगाए जाने वाले भारी जुर्माने को खत्म करने की मांग भी कर रहे हैं। इसके साथ ही पंजाब हाईवे पेट्रोल को कमर्शियल वाहनों के चालान काटने का अधिकार दिए जाने का भी विरोध किया जा रहा है। भारी वाहन लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की मांग भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है।
सरकार की ओर से बातचीत दोबारा शुरू करने की बात कही गई है। संचार मंत्री अलीम खान के अनुसार सोमवार को ट्रांसपोर्टरों के साथ बातचीत का एक और दौर हो सकता है। हालांकि ट्रांसपोर्टर मांगें पूरी होने तक हड़ताल खत्म करने के मूड में नहीं हैं।
अगर यह चक्का जाम लंबे समय तक जारी रहता है तो पाकिस्तान के बड़े शहरों में रोजमर्रा की जरूरी चीजों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। लाहौर कराची इस्लामाबाद और पेशावर जैसे शहरों में खाद्य पदार्थों के साथ पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पर भी दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती ट्रांसपोर्टरों की मांगों और आर्थिक दबाव के बीच ऐसा रास्ता निकालना है जिससे देश की सप्लाई चेन को पूरी तरह चरमराने से बचाया जा सके।
