नई दिल्ली। दुनिया के कई देशों में खाद्य संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। पाकिस्तान भी उन देशों में शामिल है जहां लाखों लोगों के सामने दो वक्त की रोटी जुटाना बड़ी चुनौती बन गया है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठन एक्शन अगेंस्ट हंगर की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में वर्ष 2026 के दौरान करीब 1.06 करोड़ लोगों को जीवित रहने के लिए तत्काल मानवीय सहायता की जरूरत पड़ सकती है। यह आंकड़ा देश में गरीबी बेरोजगारी महंगाई और प्राकृतिक आपदाओं के कारण पैदा हुए संकट की गंभीरता को उजागर करता है। रिपोर्ट में पाकिस्तान के अलावा दुनिया के नौ अन्य देशों को भी गंभीर खाद्य संकट से प्रभावित बताया गया है।
पाकिस्तान में आर्थिक हालात लंबे समय से आम लोगों के लिए चुनौती बने हुए हैं। महंगाई के कारण खाने पीने की वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई परिवारों की आमदनी उनकी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं रह गई है। बेरोजगारी और आय के सीमित अवसरों के कारण लोगों की भोजन और पौष्टिक आहार तक पहुंच प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक संकेतकों में सुधार के दावों के बावजूद बड़ी आबादी के सामने खाद्य सुरक्षा की समस्या बनी हुई है।
पाकिस्तान में खाद्य संकट की एक बड़ी वजह प्राकृतिक आपदाएं भी हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ सूखा भीषण गर्मी और अनियमित मानसूनी बारिश जैसी घटनाओं का असर खेती पर पड़ता है। फसलों को नुकसान पहुंचने से किसानों की आमदनी घटती है और खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता तथा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही पशुपालन पर निर्भर परिवारों को भी नुकसान उठाना पड़ता है। जलवायु परिवर्तन और मौसम की अनिश्चितता ने पहले से आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
मानवीय सहायता में कमी आने से हालात और चिंताजनक हो सकते हैं। जब जरूरतमंद परिवारों को पर्याप्त आर्थिक मदद और भोजन उपलब्ध नहीं हो पाता तो उन्हें अपनी बुनियादी जरूरतों में कटौती करनी पड़ती है। कुछ परिवार कम भोजन करने या दिन में एक समय का खाना छोड़ने के लिए मजबूर हो सकते हैं। आर्थिक संकट से जूझ रहे लोगों को अपने पशु और दूसरी संपत्तियां बेचने जैसे कदम भी उठाने पड़ सकते हैं। बच्चों की शिक्षा पर भी इसका असर पड़ने की आशंका रहती है क्योंकि परिवारों को सीमित संसाधनों में भोजन और अन्य जरूरी खर्चों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। लंबे समय तक पर्याप्त पोषण नहीं मिलने से बच्चों और महिलाओं में कुपोषण का खतरा बढ़ सकता है।
एक्शन अगेंस्ट हंगर की रिपोर्ट में पाकिस्तान के अलावा नाइजीरिया कांगो सूडान यमन अफगानिस्तान म्यांमार बांग्लादेश दक्षिण सूडान और सीरिया को भी गंभीर खाद्य संकट का सामना करने वाले देशों में शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इन दस देशों में लगभग 17.7 करोड़ लोग गंभीर भूख की समस्या से प्रभावित हैं। इन देशों में संघर्ष राजनीतिक अस्थिरता गरीबी जलवायु संबंधी आपदाएं और मानवीय सहायता की कमी जैसे अलग-अलग कारण खाद्य संकट को बढ़ाते हैं। हालांकि हर देश में संकट की परिस्थितियां और उसकी तीव्रता अलग-अलग हैं।
वैश्विक स्तर पर खाद्य संकट का बढ़ना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है। भूख से निपटने के लिए केवल भोजन उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि प्रभावित परिवारों की आय बढ़ाने कृषि व्यवस्था मजबूत करने और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की क्षमता विकसित करने की भी जरूरत है। पाकिस्तान समेत दूसरे प्रभावित देशों में समय पर मानवीय सहायता पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि संकट से निपटने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो करोड़ों लोगों के जीवन और भविष्य पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
