नेतन्याहू ने कहा कि कई देशों द्वारा सोशल मीडिया पर गलत जानकारी और फर्जी प्रचार के जरिए हेरफेर की कोशिशें की जा रही हैं और पाकिस्तान जैसे देशों से ऐसे डिजिटल ऑपरेशन सामने आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इंटरनेट पर जो इजरायल विरोधी संदेश तेजी से फैलते हैं, उनकी शुरुआती गतिविधियां अक्सर पाकिस्तान से जुड़ी पाई जाती हैं। हालांकि इन आरोपों पर पाकिस्तान की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
इसी इंटरव्यू में नेतन्याहू ने भारत की जमकर तारीफ की और भारत-इजरायल संबंधों को बेहद मजबूत और भरोसेमंद बताया। उन्होंने कहा कि जब वे अपनी पत्नी के साथ भारत यात्रा पर गए थे तो वहां उन्हें जिस तरह का सम्मान और गर्मजोशी मिली, वह उनके लिए “प्यार के उत्सव” जैसा अनुभव था। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में इजरायल और उसके नागरिकों को काफी सम्मान मिलता है और दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं।
नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी सराहना की और कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी बहुत गहरी है। उन्होंने बताया कि भारत और इजरायल के बीच रक्षा, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्रों में लगातार सहयोग बढ़ रहा है।
इसी बातचीत के दौरान ईरान मुद्दे पर बोलते हुए नेतन्याहू ने दावा किया कि अगर हालिया सैन्य कार्रवाई नहीं की जाती तो ईरान बहुत जल्दी परमाणु हथियार विकसित कर सकता था। उन्होंने कहा कि ईरान लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को मजबूत करने में लगा हुआ है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि ईरान के भीतर राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही है और शासन के अंदर दरारें सामने आ रही हैं। उनके अनुसार देश में हाल की घटनाओं के बाद विरोध प्रदर्शन और असंतोष बढ़ा है, जिससे वहां की सरकार कमजोर स्थिति में दिखाई दे रही है।
कुल मिलाकर इस इंटरव्यू में नेतन्याहू ने एक तरफ पाकिस्तान पर डिजिटल युद्ध और दुष्प्रचार के गंभीर आरोप लगाए, वहीं दूसरी तरफ भारत के साथ रिश्तों को मजबूत और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण बताया, जिससे यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
