निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार छह अगस्त से शुरू हो रहे इस अभियान में अनिल मेनन अपनी सहयोगी अंतरिक्ष यात्री के साथ कक्षीय प्रयोगशाला के बाहर जाकर विशेष रोल-आउट सोलर एरे स्थापित करने की पूर्व-तैयारियां करेंगे। यह नई सौर ऊर्जा प्रणाली अंतरिक्ष स्टेशन को अतिरिक्त बिजली की आपूर्ति प्रदान करेगी, जो भविष्य में प्रयोगशाला के नियंत्रित संचालन और शोध गतिविधियों के लिए आवश्यक है। इसके बाद अगस्त के मध्य में प्रस्तावित दूसरी स्पेसवॉक के दौरान पृथ्वी स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर और अंतरिक्ष स्टेशन के बीच उच्च-गति डेटा ट्रांसमिशन सुनिश्चित करने वाले मुख्य संचार एंटीना को बदला जाएगा।
अगस्त के अंतिम सप्ताह में आयोजित होने वाली तीसरी और अंतिम स्पेसवॉक में पावर केबल, डेटा रिले प्रणालियों को जोड़ने तथा अंतरिक्ष यान की सुरक्षित डॉकिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले नेविगेशन उपकरणों को अद्यतन करने का कार्य किया जाएगा। अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ा यह बहुस्तरीय तकनीकी अभियान आने वाले वर्षों में वैज्ञानिक प्रयोगों और विभिन्न अभियानों के सुचारू संचालन में अहम भूमिका निभाएगा। पिछले माह अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचे मेनन वहां लगभग आठ महीने का समय बिताएंगे और इस दौरान विभिन्न वैश्विक शोध परियोजनाओं में भाग लेंगे।
अनिल मेनन द्वारा की जाने वाली यह चहलकदमी न केवल नासा के भावी अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए आधार तैयार करेगी, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान में भारतवंशी विशेषज्ञों की बढ़ती भागीदारी को भी रेखांकित करती है। इस संपूर्ण मिशन के सफलतापूर्वक पूरे होने से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की परिचालन दक्षता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी और वैज्ञानिक डेटा के त्वरित आदान-प्रदान में मदद मिलेगी। इस ऐतिहासिक मिशन की ओर पूरी दुनिया के अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थानों की निगाहें टिकी हुई हैं।
