पेजेशकियन ने एक इंटरव्यू में बताया कि बैठक में सबसे ज्यादा जोर ईरान के भीतर एकता बनाए रखने पर रहा। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल बाहरी दबाव नहीं बल्कि आंतरिक मतभेद भी हैं। ईरानी नेतृत्व का मानना है कि विरोधी ताकतें देश में विभाजन पैदा करने की कोशिश कर सकती हैं और ऐसे समय में राजनीतिक नेतृत्व तथा जनता के बीच सहयोग बेहद जरूरी है।
मोजतबा खामेनेई को मार्च में ईरान का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया था। उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल से जुड़े हमले में मौत के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी मिली थी। पद संभालने के बाद से मोजतबा की सार्वजनिक मौजूदगी बेहद सीमित रही है। इसी वजह से उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर कई तरह की अटकलें भी सामने आती रही हैं। राष्ट्रपति के साथ उनकी यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब ईरान अमेरिका के साथ बेहद तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहा है।
बैठक में आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानियों पर भी चर्चा हुई। पेजेशकियन के अनुसार बाजार की स्थिति रोजगार आवास और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण पैदा हो रही आर्थिक दिक्कतें प्रमुख मुद्दों में शामिल रहीं। ईरानी नेतृत्व के सामने चुनौती यह है कि बाहरी दबाव के बीच देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों की जरूरतों को किस तरह संभाला जाए।
अमेरिका के साथ विवाद में ईरान ने अपना रुख भी काफी सख्त रखा है। ईरान चाहता है कि उसके बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी खत्म की जाए। इसके अलावा युद्ध के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा आर्थिक प्रतिबंध हटाने और विदेशों में जब्त की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करने की मांग भी की गई है। ईरान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि इन मुद्दों पर समाधान के बिना होर्मुज जलडमरूमध्य को स्थायी रूप से खोलने का फैसला आसान नहीं होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में जारी तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ईरान ओमान के साथ भी जलमार्ग से जुड़ी आवाजाही को लेकर बातचीत कर रहा है।
इसी बीच ईरान ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर मोहसेन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का प्रमुख बनाया गया है। लंबे समय तक रिवोल्यूशनरी गार्ड का नेतृत्व कर चुके रेजाई को सख्त रुख के लिए जाना जाता है। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी भी दी है कि यदि ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रही तो अमेरिकी सैनिकों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान फिलहाल आंतरिक एकता आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। अमेरिका के साथ बातचीत की संभावना बनी हुई है लेकिन ईरान अपनी शर्तों पर समझौते की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में मोजतबा खामेनेई की रणनीति और होर्मुज को लेकर ईरान का फैसला पूरे क्षेत्र की राजनीति और वैश्विक बाजार के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।
