नई दिल्ली। रूस की परमाणु क्षमता से लैस नई पीढ़ी की क्रूज मिसाइल बुरेवेस्टनिक (9M730 Burevestnik) एक बार फिर चर्चा में है। आर्कटिक क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और विमानों की बढ़ती आवाजाही से ऐसी अटकलें तेज हुई हैं कि रूस इस परमाणु-संचालित मिसाइल का नया फ्लाइट टेस्ट कर सकता है। हालांकि, रूस ने संभावित परीक्षण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
बुरेवेस्टनिक को रूस लंबे समय से ऐसी मिसाइल के रूप में पेश करता रहा है जिसकी मारक क्षमता बेहद लंबी बताई जाती है। इसे परमाणु वॉरहेड ले जाने में सक्षम बताया गया है और इसकी खासियत इसका कथित परमाणु-ऊर्जा आधारित प्रोपल्शन सिस्टम है।
नोवाया जेमल्या में बढ़ी हलचल
हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, रूस के आर्कटिक क्षेत्र स्थित नोवाया जेमल्या में सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। रिपोर्टों के अनुसार, रोगाचेवो एयरबेस पर दो Il-976 SKIP विमान पहुंचे हैं। इन विमानों का इस्तेमाल मिसाइल परीक्षण के दौरान उसके रास्ते और उड़ान से जुड़े आंकड़े जुटाने के लिए किया जाता है।
बेस पर एक A-50U एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग विमान, चार An-26 परिवहन विमान, एक An-74 और कई हेलिकॉप्टर भी दिखाई दिए हैं। इसके अलावा पिछले बुरेवेस्टनिक परीक्षणों से जुड़े कुछ नागरिक जहाजों की भी बैरेंट्स और कारा सागर में मौजूदगी बताई गई है।
नॉर्वे के रक्षा विश्लेषक थोर्ड अरे इवरसेन के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई दे रही गतिविधियां बुरेवेस्टनिक के पिछले परीक्षणों से मिलती-जुलती हैं। उनके अनुसार, इससे संकेत मिलता है कि रूस मिसाइल के फ्लाइट टेस्ट की तैयारी कर रहा हो सकता है।
14 परीक्षणों में कितनी बार सफल हुई?
रिपोर्टों के मुताबिक, बुरेवेस्टनिक का अब तक करीब 14 बार परीक्षण किया जा चुका है, लेकिन इनमें सफलता सीमित रही है। रूस ने 2022 और 2025 के परीक्षणों को सफल बताया था।
रूसी जनरल वैलेरी गेरासिमोव ने दावा किया था कि 2025 के कथित सफल परीक्षण के दौरान मिसाइल ने करीब 15 घंटे में 14,000 किलोमीटर की दूरी तय की। रूस का दावा है कि उड़ान के दौरान मिसाइल ने अलग-अलग ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज दिशाओं में निर्धारित गतिविधियां कीं और उसकी एयर डिफेंस से बचने की क्षमता का प्रदर्शन हुआ।
इसके मुकाबले 2022 में हुआ परीक्षण महज करीब दो मिनट तक चला था।
इसे ‘फ्लाइंग चेरनोबिल’ क्यों कहा जाता है?
बुरेवेस्टनिक की सबसे असामान्य विशेषता इसका कथित न्यूक्लियर पावर प्रोपल्शन सिस्टम है। इसी वजह से पश्चिमी विश्लेषकों में इसे लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं।
इसे कभी-कभी ‘फ्लाइंग चेरनोबिल’ कहा जाता है। यह नाम 1986 की चेरनोबिल परमाणु दुर्घटना से जुड़ी आशंकाओं को दर्शाता है। चिंता यह है कि परमाणु रिएक्टर से संचालित इस तरह की मिसाइल के परीक्षण या दुर्घटना की स्थिति में रेडियोधर्मी सामग्री के फैलने का जोखिम पैदा हो सकता है।
नाटो ने बुरेवेस्टनिक के लिए ‘Skyfall’ नाम इस्तेमाल किया है। अमेरिकी विदेश विभाग के पूर्व अधिकारी थॉमस कंट्रीमैन ने भी इस हथियार प्रणाली को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की थी।
MIT के शोधकर्ताओं ने कैसे समझा डिजाइन?
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के शोधकर्ताओं ने रूसी मीडिया में उपलब्ध तस्वीरों और वीडियो का विश्लेषण कर बुरेवेस्टनिक के आकार और संभावित डिजाइन का अनुमान लगाने की कोशिश की।
प्रोफेसर जेक हेक्ला और उनके सहयोगी आर. स्कॉट केम्प के विश्लेषण के मुताबिक, मिसाइल रूस की बड़ी क्रूज मिसाइलों से बड़ी है, लेकिन अत्यधिक विशाल नहीं है।
एयरोडायनामिक मॉडलिंग के आधार पर शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि इसे हवा में बनाए रखने के लिए करीब Mach 0.75, यानी लगभग 575 मील प्रति घंटे की गति की जरूरत हो सकती है। यह गति करीब-करीब किसी आधुनिक यात्री विमान की क्रूजिंग स्पीड के आसपास है।
न्यूक्लियर रिएक्टर से कैसे मिलती है ताकत?
शोधकर्ताओं के अनुसार, बुरेवेस्टनिक में डायरेक्ट-साइकिल एयर-ब्रीदिंग न्यूक्लियर प्रोपल्शन जैसी तकनीक इस्तेमाल होने की संभावना है।
सरल शब्दों में समझें तो इस अवधारणा में हवा को इंजन के भीतर मौजूद परमाणु रिएक्टर से सीधे गुजारा जाता है। रिएक्टर की ऊर्जा हवा को बेहद गर्म करती है और गर्म हवा को पीछे की ओर तेजी से निकालकर थ्रस्ट पैदा किया जाता है।
यह सामान्य परमाणु रिएक्टरों से अलग अवधारणा है, जहां रिएक्टर की गर्मी को एक अलग कूलेंट सिस्टम के जरिए दूसरे चरण में पहुंचाया जाता है।
हेक्ला के मुताबिक, अप्रत्यक्ष सिस्टम की संभावना पूरी तरह खारिज नहीं की जा सकती, लेकिन उसका अतिरिक्त वजन और जटिलता इसे कम संभावित विकल्प बनाती है।
‘असीमित रेंज’ का दावा कितना अहम?
बुरेवेस्टनिक को लेकर रूस का सबसे बड़ा दावा इसकी बेहद लंबी या लगभग असीमित रेंज है। पारंपरिक क्रूज मिसाइलों में ईंधन की सीमा सबसे बड़ी बाधाओं में से एक होती है। परमाणु प्रोपल्शन का उद्देश्य इसी सीमा को काफी हद तक कम करना है।
अगर यह तकनीक व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से काम करती है, तो मिसाइल लंबे समय तक हवा में रह सकती है और अप्रत्याशित दिशा से लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता हासिल कर सकती है। यही वजह है कि पश्चिमी देशों में इसके संभावित परीक्षणों पर नजर रखी जा रही है।
हालांकि, बुरेवेस्टनिक की वास्तविक क्षमता, विश्वसनीयता और संचालन संबंधी दावों को लेकर स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी सीमित है। रूस की ओर से संभावित नए परीक्षण की भी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
