अभ्यास के दौरान मंगोलियाई सैनिकों को छोटे हथियारों से जुड़े प्रशिक्षण का व्यावहारिक अनुभव दिया गया। जवानों ने हथियारों की पहचान और उनकी कार्यप्रणाली के साथ सुरक्षा ड्रिल लोडिंग और अनलोडिंग निशाना लगाने तथा फायरिंग जैसी गतिविधियों में हिस्सा लिया। प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के दौरान हथियारों को सुरक्षित और अनुशासित तरीके से इस्तेमाल करने पर विशेष ध्यान दिया गया। इससे मंगोलियाई सैनिकों को भारतीय सेना की प्रशिक्षण पद्धति और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं को करीब से समझने का अवसर मिला।
भारतीय सेना की टुकड़ी ने इस दौरान रूम इंटरवेंशन ड्रिल का भी प्रदर्शन किया। इस ड्रिल में कमरे में व्यवस्थित तरीके से प्रवेश तलाशी समन्वित मूवमेंट संचार फायर अनुशासन और घायल व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने जैसी तकनीकों को प्रदर्शित किया गया। आबादी वाले इलाकों में अभियान के दौरान टीमवर्क और स्थितिजन्य जागरूकता बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों के सैनिकों ने एक दूसरे के साथ हैंड्स ऑन ट्रेनिंग भी की। इससे जवानों को अपनी तकनीकों और प्रक्रियाओं को साझा करने का मौका मिला।
अभ्यास के दौरान मंगोलियाई सैनिकों ने अपनी पारंपरिक मार्शल कला की झलक भी पेश की। उन्होंने मंगोलियाई क्लासिकल कुश्ती बोख और बिना हथियार के युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया। पारंपरिक कुश्ती तकनीकों नियंत्रित ग्रैपलिंग और क्लोज कॉम्बैट मूवमेंट के जरिए मंगोलियाई जवानों ने अपनी ताकत फुर्ती अनुशासन और शारीरिक दक्षता का प्रदर्शन किया। इस गतिविधि ने सैन्य प्रशिक्षण के साथ दोनों देशों के सैनिकों के बीच पेशेवर संवाद और आपसी समझ को भी बढ़ाया।
नोमैडिक एलीफेंट 2026 का व्यापक उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के तहत अर्ध शहरी और पहाड़ी इलाकों में आतंकवाद रोधी अभियानों के लिए दोनों देशों की संयुक्त सैन्य क्षमता को मजबूत करना है। अभ्यास के दौरान सैनिकों को अलग अलग परिस्थितियों में मिलकर काम करने और सामरिक स्तर पर बेहतर तालमेल विकसित करने का अवसर मिल रहा है। भारत और मंगोलिया के बीच लंबे समय से रक्षा सहयोग जारी है और नोमैडिक एलीफेंट जैसे अभ्यास इसी सहयोग को व्यावहारिक प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाते हैं। पिथौरागढ़ में चल रहा यह सैन्य अभ्यास दोनों देशों के जवानों को एक दूसरे की कार्यप्रणाली समझने के साथ संयुक्त अभियानों के लिए बेहतर समन्वय विकसित करने का मंच दे रहा है।
