नई दिल्ली। इराक की एक प्राचीन गुफा में मिला 75 हजार साल पुराना मानव कंकाल इतिहास की एक रहस्यमयी घटना की ओर इशारा कर रहा है। पुरातत्वविदों ने इस कंकाल का अध्ययन करने के बाद आशंका जताई है कि प्राचीन मानव की मौत किसी नुकीले हथियार से लगी चोट के कारण हुई हो सकती है। कंकाल के कंधे की हड्डी में मिला गोल छेद इस संभावना को मजबूत करता है कि व्यक्ति पर भाले जैसी किसी वस्तु से वार किया गया था। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह मामला इंसानी इतिहास में जानबूझकर की गई हिंसा के सबसे पुराने संभावित उदाहरणों में शामिल हो सकता है। हालांकि शोधकर्ता अभी निश्चित रूप से यह नहीं कह सकते कि यह हत्या थी या किसी अन्य परिस्थिति में लगी जानलेवा चोट। इस खोज ने प्राचीन मानवों के जीवन और उनके बीच होने वाली हिंसक घटनाओं को समझने का एक नया रास्ता खोल दिया है।
यह कंकाल इराक की प्रसिद्ध शानिदार गुफा में मिला था। यह स्थान नेअंडरथल मानवों के अवशेषों और उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्यों के लिए जाना जाता है। यहां पहले भी ऐसे अवशेष मिले हैं जो बताते हैं कि प्राचीन मानव अपने मृतकों के साथ विशेष व्यवहार करते थे और संभवतः उन्हें दफनाने की परंपरा भी निभाते थे। शोधकर्ताओं ने इस नए कंकाल को शनिदार ए नाम दिया है। हालांकि इसके सभी अंग सुरक्षित नहीं मिले हैं। अवशेषों में दायां हाथ लगभग पूरा है जबकि तीन पसलियां छह दांत और बाएं कंधे की हड्डी भी शामिल हैं। इन्हीं हड्डियों की जांच के दौरान वैज्ञानिकों को ऐसी चोट का निशान मिला जिसने पूरे अध्ययन को खास बना दिया।
शोधकर्ताओं की नजर कंधे की हड्डी के किनारे मौजूद लगभग 1.5 सेंटीमीटर व्यास वाले गोल छेद पर पड़ी। इसके आसपास हड्डी का एक छोटा गोल टुकड़ा भी मिला जो ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी नुकीली वस्तु के दबाव से बाहर की ओर धकेला गया हो। वैज्ञानिकों ने यह समझने की कोशिश की कि यह छेद व्यक्ति की मृत्यु के बाद जमीन में दबे रहने के कारण बना या चोट जीवनकाल के अंतिम समय में लगी थी। चोट की बनावट और उसके आसपास मौजूद निशानों के अध्ययन से यह संभावना सामने आई कि नुकसान मृत्यु के आसपास के समय हुआ होगा। इसी आधार पर शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि किसी भाले या दूसरे नुकीले हथियार से वार किया गया हो सकता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार हमला सामने की ओर से हुआ हो सकता है और हथियार सीने या कंधे के क्षेत्र तक पहुंचा होगा। यह भी संभव है कि भाला फेंककर मारा गया हो या नजदीक से जोर लगाकर शरीर में घोंपा गया हो। यदि यह हमला जानबूझकर किया गया था तो यह प्राचीन मानवों के बीच गंभीर हिंसा का एक महत्वपूर्ण प्रमाण हो सकता है। लेकिन शोधकर्ता इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं कि हमलावर कोई दूसरा नेअंडरथल था या चोट शिकार के दौरान हुए हादसे में लगी थी। इसलिए इस घटना को निश्चित रूप से इतिहास का सबसे पुराना कत्ल कहना जल्दबाजी होगी। फिलहाल इसे प्राचीन काल में संभावित जानलेवा हिंसा के एक अहम मामले के रूप में देखा जा रहा है।
इस खोज का महत्व केवल संभावित हत्या तक सीमित नहीं है। कंकाल के दांतों की जांच से भी उस व्यक्ति के जीवन के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं। उसके छह दांत काफी घिस चुके थे और सामने का एक दांत जीवनकाल में ही टूटकर दो हिस्सों में बंट गया था। दांत पर जमा मोटी परत से संकेत मिलता है कि वह टूटने के बाद भी लंबे समय तक जीवित रहा होगा। अनुमान है कि वह कम से कम एक साल या उससे अधिक समय तक जीवित रहा हो सकता है। चेहरे और जबड़े पर पुरानी चोट लगने की संभावना भी जताई गई है। इससे पता चलता है कि प्राचीन मानवों को चोट लगने के बाद भी लंबे समय तक जीवन बिताना पड़ता था और उनकी शारीरिक स्थिति का अध्ययन उनके जीवन की परिस्थितियों को समझने में मदद करता है।
शानिदार गुफा में इससे पहले भी गंभीर चोटों वाले नेअंडरथल के अवशेष मिले हैं। वर्ष 2009 में मिले एक वयस्क पुरुष के कंकाल की पसली पर कट का निशान पाया गया था। ऐसे प्रमाण बताते हैं कि प्राचीन मानवों का जीवन केवल भोजन जुटाने और जीवित रहने के संघर्ष तक सीमित नहीं था बल्कि उन्हें चोटों दुर्घटनाओं और संभावित हिंसक टकरावों का भी सामना करना पड़ता था। इराक की इस गुफा से मिला नया कंकाल हजारों साल पुराने जीवन की अनकही कहानी सामने लाता है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष के लिए वैज्ञानिक साक्ष्यों और उनकी व्याख्या को सावधानी से समझना जरूरी है।
