नई दिल्ली ।अमेरिका और चीन के बीच तनाव के बीच जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए मिसाइल हमले को लेकर एक नया आरोप सामने आया है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान को चीन से जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे की हाई-क्वालिटी सैटेलाइट तस्वीरें मिली थीं। अधिकारियों के अनुसार, इन तस्वीरों से ईरान को सैन्य अड्डे और वहां मौजूद अमेरिकी सैनिकों की स्थिति को समझने में मदद मिल सकती थी।
अमेरिकी अधिकारियों ने जॉर्डन में मौजूद मुवफ्फक सलती एयर बेस पर हुए हमले और चीन से मिली तस्वीरों के बीच संबंध होने की बात कही है। उनके अनुसार, ईरान ने इस सैन्य अड्डे की साफ और विस्तृत सैटेलाइट तस्वीरें हासिल की थीं। माना जा रहा है कि ऐसी तस्वीरों से बेस की स्थिति और वहां की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाना आसान हो सकता था।
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाकर किए गए हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी, जबकि चार अन्य सैनिक घायल हुए थे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, सैनिकों के रहने वाली जगह पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया था। हमले के समय कई अमेरिकी सैनिक सो रहे थे।
यह हमला 24 घंटे के भीतर सैन्य अड्डे पर हुए तीन मिसाइल हमलों में से एक था। अप्रैल में हुए सीजफायर के बाद यह पहली ऐसी घटना थी, जिसमें अमेरिकी सैनिकों की जान गई। इसी वजह से हमले से जुड़ी जानकारी के स्रोत और उससे संबंधित संभावित सहायता को लेकर अमेरिकी स्तर पर जांच और सवालों का सिलसिला जारी है।
हालांकि, अमेरिका ने यह दावा नहीं किया है कि चीन की सरकार ने सीधे तौर पर ईरान को अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने में मदद की थी। अमेरिकी अधिकारियों ने चीन के सामने सैटेलाइट तस्वीरों से संबंधित सवाल उठाए थे। इसके जवाब में चीन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।
चीन ने अमेरिका से अपने आरोपों के समर्थन में सबूत भी मांगे हैं। अमेरिका की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि चीन की कौन-सी कंपनी या संस्था ने कथित तौर पर ये सैटेलाइट तस्वीरें ईरान को उपलब्ध कराई थीं। इसलिए तस्वीरों की आपूर्ति से जुड़े संस्थानों की पहचान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अमेरिका इससे पहले भी ईरान को सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध कराने के आरोप में चीन की तीन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। ऐसे में जॉर्डन के सैन्य अड्डे से जुड़ा नया आरोप दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव के बीच सामने आया है।
पूरे मामले में मुख्य सवाल यह है कि जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें ईरान तक किस माध्यम से पहुंचीं और उनका इस्तेमाल किस तरह किया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने तस्वीरों और हमले के बीच संबंध की संभावना जताई है, जबकि चीन ने सीधे तौर पर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है।
जॉर्डन में हुए हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत और चार सैनिकों के घायल होने के बाद यह मामला अमेरिका के लिए सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन गया है। वहीं, चीन पर लगे आरोपों से अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ने की स्थिति भी बनी हुई है।
