ट्रंप ने कहा कि विटकॉफ और कुशनर ने ईरान के साथ समझौते को लेकर मध्यस्थों से मुलाकात की। उन्होंने बातचीत को लेकर कहा कि कई चीजें अच्छी तरह आगे बढ़ रही हैं। ट्रंप के मुताबिक बैठक करीब तीन घंटे चली और इसके खत्म होने के लगभग एक घंटे बाद उन्होंने इसकी जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही बातचीत का अगला दौर हो सकता है।
विटकॉफ की पहल पर हुई अराघची से मुलाकात
ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी पक्ष की पहल पर अराघची और विटकॉफ के बीच संपर्क हुआ। बातचीत में ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने की शर्तें रखी गईं। रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करने और सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने की मांग रखी है।
अमेरिकी विशेष दूत विटकॉफ ने भी कहा कि अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत मध्यस्थों के जरिए हुई। मध्यस्थ दिनभर दोनों पक्षों के बीच आते-जाते रहे। विटकॉफ ने इस दौर की बातचीत को आगे के लिए रचनात्मक और उम्मीद जगाने वाला बताया।
होर्मुज बना बातचीत का अहम मुद्दा
बातचीत में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रमुख मुद्दों में रहा है। ईरान की ओर से कहा गया है कि अमेरिकी सैन्य दबाव और नाकाबंदी में राहत मिलने पर होर्मुज को फिर से खोलने पर चर्चा आगे बढ़ सकती है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए इसके जरिए होने वाला समुद्री आवागमन अमेरिका-ईरान तनाव का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
UNGA में ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी
इस बातचीत से पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा में ट्रंप ने ईरान को कड़ा संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि उनके सामने दो रास्ते हैं—ईरान के साथ ऐसा समझौता हो जिससे वह आगे बढ़ सके या फिर अमेरिका उसके खिलाफ और कठोर सैन्य कार्रवाई करे। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ट्रंप ने यह आरोप भी लगाया कि ईरान अमेरिकी मध्यावधि चुनाव तक किसी समझौते को टालने की कोशिश कर रहा है। उनके भाषण के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल के कई सदस्य विरोध में हॉल से बाहर चले गए। इसके बावजूद उसी दिन न्यूयॉर्क में दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत हुई, जिससे कूटनीतिक संपर्क का एक नया दौर सामने आया है।
हालांकि, बातचीत को लेकर अभी किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है। अमेरिकी और ईरानी पक्ष के बीच सैन्य दबाव, होर्मुज, प्रतिबंधों और फ्रीज संपत्तियों समेत कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।
