करीब 285 मीटर लंबा यह एयरक्राफ्ट कैरियर क्षमता और आकार के लिहाज से यूरोप के प्रमुख युद्धपोत Charles de Gaulle को भी चुनौती देता नजर आएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पर करीब 60 लड़ाकू विमान और अत्याधुनिक ड्रोन तैनात किए जा सकेंगे। ‘शॉर्ट टेक-ऑफ’ सिस्टम से लैस यह कैरियर समुद्र में चलते-फिरते एयरबेस की तरह काम करेगा।
दरअसल, इजरायल के साथ बढ़ती तल्खी और ग्रीस-साइप्रस गठजोड़ के मजबूत होने से तुर्की खुद को पूर्वी भूमध्य सागर में दबाव में महसूस कर रहा है। इसी कारण अंकारा अब अपनी नौसैनिक क्षमता को तेजी से अपग्रेड कर रहा है। हालात ऐसे हैं कि नेफ्ताली बेनेट जैसे नेता तुर्की को “नया ईरान” तक बता चुके हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और गहरा गया है।
MUGEM प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसकी भविष्य-केंद्रित तकनीक है। तुर्की इस पर स्टील्थ ड्रोन Bayraktar Kizilelma, नेवल ड्रोन Bayraktar TB3, हल्के लड़ाकू विमान Hurjet और पांचवीं पीढ़ी के फाइटर KAAN के नौसैनिक वर्जन को तैनात करने की तैयारी कर रहा है। यानी यह कैरियर पारंपरिक युद्धपोत से आगे बढ़कर ‘ड्रोन और एआई आधारित युद्ध’ का प्लेटफॉर्म बनने जा रहा है।
तुर्की की रणनीति सिर्फ भूमध्य सागर तक सीमित नहीं है। Horn of Africa, खासकर सोमालिया और सूडान में बढ़ती सक्रियता के बीच यह कैरियर उसकी वैश्विक सैन्य पहुंच को मजबूत करेगा। ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षा, समुद्री मार्गों पर पकड़ और तेजी से सैन्य तैनाती इन सभी में यह जहाज अहम भूमिका निभाएगा।
कुल मिलाकर, MUGEM सिर्फ एक एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं बल्कि तुर्की की ‘ग्लोबल पावर’ बनने की रणनीति का प्रतीक है जहां समुद्री ताकत, स्टील्थ तकनीक और ड्रोन युद्ध मिलकर आने वाले समय की जंग का नया नक्शा तैयार कर रहे हैं।
