अंबिका ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि दोस्ती अपनी जगह है, लेकिन सार्वजनिक रूप से साथ नजर आने से अगर किसी दोस्त को आलोचना या परेशानी का सामना करना पड़े, तो ऐसी स्थिति को समझते हुए सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा कि अगर वह तृषा की जगह होतीं और उन्हें लगता कि उनकी वजह से उनके दोस्त को परेशानी या शर्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता है, तो वह ऐसी स्थिति से पीछे हटना पसंद करतीं।
अंबिका ने यह बात विजय के मौजूदा सार्वजनिक पद के संदर्भ में कही। उनके मुताबिक, जब कोई व्यक्ति जीवन में बड़े मुकाम पर पहुंच जाता है और उसके साथ सार्वजनिक रूप से दिखाई देने वाली हर चीज चर्चा का विषय बन सकती है, तो करीबी लोगों को भी परिस्थितियों को समझना चाहिए।
हालांकि, अंबिका ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी बात का मतलब दोस्ती खत्म करना नहीं है। उन्होंने दोस्ती और सार्वजनिक मौजूदगी को अलग-अलग नजरिए से देखने की बात कही। उनके अनुसार, किसी व्यक्ति के बड़े पद पर पहुंचने के बाद पुरानी दोस्ती को समाप्त करने की जरूरत नहीं होती।
अंबिका ने कहा कि अगर दो लोग लंबे समय से एक-दूसरे के दोस्त हैं, तो केवल लोगों की चर्चाओं की वजह से उनके रिश्ते को खत्म करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दोस्ती को किसी दूसरे अर्थ में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, दो लोगों के बीच लंबे समय से चली आ रही दोस्ती को केवल उनकी सार्वजनिक मौजूदगी के आधार पर अलग अर्थ देना उचित नहीं है।
तृषा और विजय की सिल्वरस्टोन में मौजूदगी के बाद उनकी दोस्ती एक बार फिर चर्चा में आई। दोनों को रेस के दौरान साथ देखा गया था। विजय ने वहां आयोजित ले मांस कप रेस में हिस्सा लिया और रेस की शुरुआत भी की। तृषा भी कार्यक्रम में मौजूद थीं। उनकी तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुलाकात को लेकर लोगों के बीच चर्चा शुरू हुई।
विजय और तृषा इससे पहले भी साथ काम कर चुके हैं और दोनों की ऑन-स्क्रीन जोड़ी दक्षिण भारतीय सिनेमा में चर्चित रही है। समय-समय पर दोनों की सार्वजनिक मौजूदगी को लेकर भी चर्चा होती रही है। हालांकि, अंबिका ने अपनी टिप्पणी में दोस्ती को किसी दूसरे रिश्ते से जोड़ने के बजाय सार्वजनिक परिस्थितियों में सावधानी बरतने पर जोर दिया।
अंबिका की टिप्पणी का मुख्य केंद्र यही रहा कि दोस्ती को बनाए रखते हुए भी ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सकता है, जिनसे किसी करीबी व्यक्ति को सार्वजनिक आलोचना या असहज स्थिति का सामना करना पड़े। उन्होंने अपनी बात व्यक्तिगत उदाहरण के जरिए रखी और कहा कि अगर उन्हें ऐसी स्थिति का अंदाजा होता, तो वह खुद पीछे हटना पसंद करतीं।
