पुत्र के जन्म के बाद परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन प्रसवोत्तर संक्रमण ने अभिनेत्री को अपनी चपेट में ले लिया था। शुरुआती दौर में स्वास्थ्य में आ रही गिरावट को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज किया गया, जिससे संक्रमण धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैलता चला गया। स्थानीय चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार और ड्रिप दिए जाने के बावजूद उनके शरीर का तापमान लगातार बढ़ता रहा। अपने नवजात शिशु के प्रति अत्यधिक लगाव के कारण वे अस्पताल जाने से बचती रहीं, जिससे स्थिति लगातार नियंत्रण से बाहर होती चली गई।
निधन वाले दिन अभिनेत्री की स्थिति में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई। शाम के समय उनका चेहरा पीला पड़ने लगा और उन्हें लगातार खून की उल्टियां होने लगीं। गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल मुंबई के जसलोक अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक वे कोमा की स्थिति में जा चुकी थीं। विशेषज्ञों की टीम ने उन्हें बचाने के भरसक प्रयास किए और स्थिति को संभालने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के डॉक्टरों से भी संपर्क साधने की कोशिशें की गईं, परंतु संक्रमण मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों तक फैल चुका था।
अस्पताल में भर्ती कराए जाने के कुछ ही घंटों भीतर आंतरिक रक्तस्राव और अंगों के काम न करने की वजह से स्थिति पूरी तरह से बिगड़ गई। अंततः देर रात चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। केवल इकत्तीस वर्ष की आयु में स्मिता पाटिल का इस तरह अचानक चले जाना संपूर्ण भारतीय फिल्म उद्योग के लिए एक कभी न पूरा होने वाला घाटा था। उनके निधन के बाद उनके नवजात शिशु का पालन-पोषण उनके माता-पिता द्वारा किया गया, जबकि भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को आज भी अत्यंत सम्मान के साथ याद किया जाता है।
