नई दिल्ली । देश के सिनेमाघरों में चल रही बॉक्स ऑफिस की जंग में इस समय क्षेत्रीय और हिंदी सिनेमा के बीच एक बड़ा फासला देखने को मिल रहा है। दक्षिण भारतीय फिल्म जगत की नई पेशकश ने अपनी जबरदस्त व्यावसायिक पकड़ का प्रदर्शन करते हुए दो सौ करोड़ रुपये के क्लब में शामिल होने की ओर मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं। वहीं दूसरी तरफ भारी-भरकम स्टार कास्ट और बड़े निर्देशकों के मार्गदर्शन में बनी बॉलीवुड की दो प्रमुख फिल्में दर्शकों की कमी के कारण सिनेमाघरों में अपनी पकड़ खोती जा रही हैं। वर्किंग डेज की शुरुआत के साथ ही इन दोनों हिंदी फिल्मों के दैनिक प्रदर्शन ग्राफ में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो फिल्म वितरकों और निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन गई है।
मेगास्टार राम चरण और जान्हवी कपूर की मुख्य भूमिकाओं से सजी फिल्म ‘पेद्दी’ अपनी रिलीज के पहले दिन से ही बॉक्स ऑफिस पर राज कर रही है। दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ-साथ हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी इस फिल्म की मांग लगातार बनी हुई है। अपनी रिलीज के सातवें दिन भी इस फिल्म ने संतोषजनक कमाई करते हुए बाजार में अपनी निरंतरता साबित की है, जबकि इसके छठे दिन का प्रदर्शन भी काफी मजबूत रहा था। अब तक के कुल संकलन के आंकड़ों को देखा जाए तो यह फिल्म बहुत जल्द एक नया रिकॉर्ड कायम करने की तरफ बढ़ रही है। इस मजबूत व्यावसायिक प्रदर्शन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बेहतर विषय-वस्तु और मजबूत स्टार वैल्यू वाली फिल्मों को दर्शक पूरे देश में हाथों-हाथ ले रहे हैं।
इसके विपरीत बॉलीवुड के बड़े सितारों से सजी रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ का जादू बॉक्स ऑफिस पर फीका पड़ता दिखाई दे रहा है। नामचीन सितारों की मौजूदगी और अनुभवी निर्देशन के बावजूद फिल्म छठे दिन अपनी रफ्तार को बरकरार रखने में नाकाम रही। पांचवें दिन के मुकाबले छठे दिन इसके कलेक्शन में बड़ी गिरावट देखने को मिली है, जिससे इसका कुल कारोबार अब तक काफी सीमित रह गया है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों से आ रही रिपोर्ट के अनुसार शाम के शो में दर्शकों की संख्या में काफी कमी आई है, जिसने फिल्म के आगे के सफर को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
वहीं इसी सप्ताह रिलीज हुई बॉलीवुड की एक अन्य प्रयोगधर्मी और डार्क थ्रिलर फिल्म ‘बंदर’ बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह पस्त नजर आ रही है। गंभीर किरदारों और सस्पेंस से भरपूर होने के बावजूद यह फिल्म शुरुआत से ही दर्शकों को थिएटर्स तक खींचने में नाकाम साबित हुई है। अपनी रिलीज के छठे दिन इस फिल्म का कलेक्शन बेहद निराशाजनक रहा, जो इसकी कुल लागत और उम्मीदों के लिहाज से बहुत मामूली है। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि सीमित प्रचार और मुख्यधारा के दर्शकों से जुड़ाव की कमी के कारण इस फिल्म का कुल संकलन अब तक के सबसे निचले स्तर पर बना हुआ है।
मौजूदा व्यापारिक आंकड़ों का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताहांत में भी ‘पेद्दी’ का दबदबा इसी तरह जारी रह सकता है क्योंकि दर्शकों के बीच इसकी लोकप्रियता और माउथ पब्लिसिटी काफी मजबूत है। दूसरी तरफ हिंदी बेल्ट की दोनों फिल्मों को अपनी साख बचाने के लिए आने वाले दिनों में असाधारण प्रदर्शन करने की जरूरत होगी, जिसकी संभावना फिलहाल बेहद कम दिखाई दे रही है। सिनेमाघरों के मालिक भी अब अपना पूरा ध्यान उस फिल्म पर केंद्रित कर रहे हैं जो लगातार फुटफॉल दे रही है, जिससे आने वाले दिनों में स्क्रीन्स की संख्या में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।
