अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लोकप्रिय गीत ‘कुछ कुछ होता है’ इंडोनेशिया में भी काफी पसंद किया जाता है। उन्होंने इसी संदर्भ का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जब भारत और इंडोनेशिया मिलकर आगे बढ़ते हैं तो केवल “कुछ कुछ” नहीं बल्कि “बहुत कुछ” होता है। प्रधानमंत्री का यह संदेश दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग, सांस्कृतिक जुड़ाव और साझा विरासत को रेखांकित करने के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर तेजी से वायरल हुआ। कई लोगों ने इसे भारतीय सिनेमा की वैश्विक लोकप्रियता और सांस्कृतिक कूटनीति का प्रभावी उदाहरण बताया। उनके संबोधन में बॉलीवुड का उल्लेख होने से भारतीय समुदाय के साथ-साथ फिल्म जगत में भी इसे लेकर उत्साह देखा गया।
फिल्म निर्माता और निर्देशक करण जौहर ने भी प्रधानमंत्री के इस उल्लेख पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि यह उनके लिए गर्व और सम्मान का विषय है कि उनकी पहली निर्देशित फिल्म का जिक्र अंतरराष्ट्रीय मंच पर किया गया। उन्होंने कहा कि प्रेम ऐसी भाषा है जो सीमाओं से परे होती है और इस गीत को वर्षों तक लोगों के दिलों में जीवित रखने के लिए उन्होंने आभार व्यक्त किया।
‘कुछ कुछ होता है’ वर्ष 1998 में रिलीज हुई थी और यही करण जौहर के निर्देशन की पहली फिल्म थी। फिल्म ने रिलीज के समय बॉक्स ऑफिस पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी और बाद के वर्षों में भी हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय फिल्मों में अपनी जगह बनाए रखी। इसकी कहानी, संगीत और संवाद आज भी दर्शकों के बीच याद किए जाते हैं।
फिल्म में शाहरुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। इसके अलावा सलमान खान, फरीदा जलाल, अनुपम खेर, जॉनी लीवर, सना सईद और रीमा लागू सहित कई कलाकारों की भूमिकाओं को भी दर्शकों ने सराहा था। फिल्म का संगीत और इसके गीत आज भी भारतीय सिनेमा की पहचान माने जाते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन में इस फिल्म का उल्लेख यह भी दर्शाता है कि भारतीय सिनेमा विश्व के अनेक देशों में सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों के बीच बॉलीवुड का प्रभाव भी दोनों देशों के लोगों को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनकर सामने आया है। जकार्ता में दिया गया यह संदेश केवल एक फिल्म के संदर्भ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव और द्विपक्षीय मित्रता को रेखांकित करने वाला प्रतीकात्मक संदेश भी बन गया।
