जांच एजेंसियों के अनुसार धमकी से जुड़े ऑडियो संदेश और सोशल मीडिया पोस्ट अलग-अलग नामों से साझा किए गए हैं। वायरल ऑडियो में एक व्यक्ति ने स्वयं को आरजू बिश्नोई बताते हुए अभिनेता पर विभिन्न आरोप लगाए और उन्हें कथित तौर पर सबक सिखाने की बात कही। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी सामने आई, जिसे जांच का हिस्सा बनाया गया है। पुलिस इन दोनों माध्यमों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कर रही है।
प्रारंभिक तकनीकी विश्लेषण में पुलिस को संबंधित डिजिटल गतिविधि का शुरुआती आईपी एड्रेस स्वीडन से जुड़ा मिला है। हालांकि जांचकर्ताओं का कहना है कि आईपी एड्रेस का इस प्रकार सामने आना अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता, क्योंकि कथित तौर पर वीपीएन और टॉर ब्राउजर जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर वास्तविक लोकेशन छिपाने की कोशिश की गई है। ऐसे मामलों में इंटरनेट ट्रैफिक कई सर्वरों के माध्यम से गुजरता है, जिससे वास्तविक स्रोत तक पहुंचना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
साइबर विशेषज्ञ अब डिजिटल लॉग, नेटवर्क गतिविधियों और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संदेश किस डिवाइस, नेटवर्क या अकाउंट से भेजे गए और क्या इसके पीछे कोई एक व्यक्ति है या संगठित समूह। फिलहाल मामले में तकनीकी जांच जारी है और संबंधित सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा गया है।
यह मामला उस समय चर्चा में आया जब आमिर खान की हालिया शादी को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इसके बाद कुछ लोगों और संगठनों ने अभिनेता पर आरोप लगाए और विरोध भी दर्ज कराया। इसी क्रम में कथित धमकी वाला ऑडियो और सोशल मीडिया पोस्ट सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं।
आमिर खान पहले भी इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनकी शादियां कानूनी प्रक्रिया के तहत संपन्न हुई हैं और किसी भी विवाह में धर्म परिवर्तन नहीं कराया गया। उन्होंने कहा था कि उनका परिवार विभिन्न धार्मिक परंपराओं का सम्मान करता है और उनकी निजी जिंदगी को लेकर फैलाई जा रही कई बातें तथ्यात्मक नहीं हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। साइबर टीम का मुख्य उद्देश्य धमकी भेजने वाले की वास्तविक पहचान स्थापित करना और यह पता लगाना है कि संदेश किस उद्देश्य से प्रसारित किए गए। फिलहाल जांच जारी है और पुलिस आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने तक किसी भी संभावना से इनकार नहीं कर रही है।
