घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सवाल उठाने शुरू कर दिए और वीडियो को लेकर अलग-अलग तरह की व्याख्याएं सामने आने लगीं। कुछ लोगों ने इसे नियमों के उल्लंघन के तौर पर देखा, जबकि कुछ ने इसे सामान्य प्रमोशनल गतिविधि का हिस्सा बताया। इस बीच मामला तेजी से बढ़ता गया और चर्चा का दायरा सोशल मीडिया से आगे तक पहुंच गया।
विवाद बढ़ने के बाद संबंधित वन्य क्षेत्र प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई। अधिकारियों ने बताया कि वायरल हो रहा वीडियो प्रतिबंधित क्षेत्र के अंदर का नहीं है, बल्कि प्रवेश द्वार के पास का है। उन्होंने साफ किया कि संरक्षित क्षेत्र के भीतर किसी भी पर्यटक को सफारी वाहन से उतरने की अनुमति नहीं होती और यह नियम सख्ती से लागू किया जाता है।
प्रशासन के अनुसार, पार्क के अंदर सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सख्त दिशा-निर्देश बनाए गए हैं, जिनका पालन सभी पर्यटकों के लिए अनिवार्य है। इस मामले में भी किसी तरह की नियम उल्लंघन की बात सामने नहीं आई है और वायरल वीडियो को लेकर जो भ्रम फैला, वह वास्तविक स्थिति से अलग है।
इस स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया कि रकुल प्रीत सिंह की ओर से किसी प्रकार का नियम उल्लंघन नहीं हुआ था। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो को बिना पूरी जानकारी के गलत तरीके से प्रस्तुत करने से गलतफहमी पैदा हो सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सोशल मीडिया पर बहस तेज रही, जहां एक तरफ लोग नियमों को लेकर सख्ती की मांग कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर कई लोग इसे बिना आधार का विवाद बता रहे थे। आधिकारिक बयान आने के बाद स्थिति काफी हद तक शांत हो गई और मामला स्पष्ट हो गया।
इसी बीच रकुल प्रीत सिंह अपनी आगामी फिल्म के प्रमोशन में व्यस्त हैं, जिसमें वह एक बड़े कलाकार समूह के साथ नजर आने वाली हैं। यह जंगल सफारी दौरा भी उसी प्रमोशनल गतिविधि का हिस्सा था, जिसे लेकर अब चर्चा का माहौल धीरे-धीरे सामान्य होता दिख रहा है।
