कुनिका सदानंद ने एक बातचीत के दौरान पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे के पदों पर बने रहने को लेकर भी सवाल उठाया। जब उनसे पूछा गया कि दोनों ने अब तक अपने पद क्यों नहीं छोड़े हैं तो उन्होंने साफ कहा कि इस सवाल का जवाब उन्हीं दोनों से पूछा जाना चाहिए। कुनिका ने बताया कि वह लंबे समय से CINTAA से जुड़ी रही हैं और पहले समिति का हिस्सा भी रह चुकी हैं। उन्होंने संगठन के पुराने दौर को याद करते हुए बताया कि उस समय कलाकार संगठन से जुड़ने का मतलब कलाकारों की मदद और उनकी सेवा करना माना जाता था।
हालांकि कुनिका को लगता है कि समय के साथ परिस्थितियां बदली हैं। उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर कहा कि अब उन्हें यह मामला कुछ अलग नजर आता है और यहां तक कि उन्होंने इसे अहंकार से जोड़कर भी देखा। उनके इस बयान के बाद CINTAA के भीतर चल रही बहस को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। हालांकि कुनिका ने अपने बयान में किसी तरह के व्यक्तिगत विवाद के बजाय संगठन के उद्देश्य और कलाकारों के हित को केंद्र में रखने की बात कही।
CINTAA में चल रहे चुनाव को लेकर कुनिका सदानंद का रुख सकारात्मक नजर आया। उन्होंने कहा कि मतदान अच्छा रहा और चुनाव की व्यवस्था भी ठीक रही है। उनके अनुसार यह चुनाव संगठन के लिए एक नई शुरुआत का रास्ता खोल सकता है। उन्हें उम्मीद है कि नई समिति ऐसी होगी जो कलाकारों की वास्तविक परेशानियों को समझेगी और उन्हें दूर करने के लिए प्रभावी तरीके से काम करेगी।
कुनिका ने यह भी स्पष्ट किया कि कलाकार संगठन का काम केवल चुनाव कराने या पदों को लेकर चर्चा तक सीमित नहीं होना चाहिए। कलाकारों की रोजमर्रा की समस्याएं उनकी प्राथमिकता में होनी चाहिए। उन्होंने कलाकारों की सुरक्षा को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल किया। खासतौर पर महिला कलाकारों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर उन्होंने गंभीरता से काम करने की जरूरत बताई।
इसके साथ ही कुनिका ने कलाकारों के बीच बराबरी और आर्थिक अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उनका मानना है कि कलाकारों को उनके काम का उचित भुगतान समय पर मिलना चाहिए। कई बार कलाकारों को काम करने के बाद भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में संगठन को इस दिशा में ठोस व्यवस्था बनाने की जरूरत है ताकि कलाकारों को अपने मेहनताने के लिए परेशान न होना पड़े।
कुनिका ने बताया कि उन्होंने चुनाव में सात उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया है और उनकी प्राथमिकता ऐसे लोगों को आगे लाना है जो कलाकारों के हित में काम कर सकें। उनके बयान से साफ है कि वह CINTAA को केवल एक पद या चुनावी संस्था के रूप में नहीं बल्कि कलाकारों की आवाज और उनके अधिकारों की सुरक्षा करने वाले संगठन के रूप में देखना चाहती हैं। अब चुनाव के बाद बनने वाली नई समिति से कलाकारों को कितनी राहत मिलती है यह आने वाला समय बताएगा।
