कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स करीब 32 अंकों की मामूली बढ़त के साथ 76,861 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 6 अंकों की बढ़त के साथ 24,002 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार से संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल बड़े फैसले लेने के बजाय चुनिंदा सेक्टरों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और बाजार सीमित दायरे में बना हुआ है।
आईटी सेक्टर ने शुरुआती कारोबार में सबसे मजबूत प्रदर्शन किया। निफ्टी आईटी सूचकांक दो प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ सबसे अधिक लाभ दर्ज करने वाला सेक्टर रहा। इसके अलावा रियल्टी, एफएमसीजी, मीडिया, सर्विसेज, हेल्थकेयर और फार्मा से जुड़े शेयरों में भी सकारात्मक रुख दिखाई दिया। इन क्षेत्रों में खरीदारी से बाजार को स्थिरता मिली और प्रमुख सूचकांक शुरुआती बढ़त बनाए रखने में सफल रहे।
इसके विपरीत रक्षा, ऊर्जा, सार्वजनिक उपक्रम, पीएसयू बैंक, मैन्युफैक्चरिंग, कमोडिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में दबाव देखने को मिला। इन क्षेत्रों में बिकवाली के कारण बाजार की तेजी सीमित रही और निवेशकों ने सतर्कता के साथ कारोबार किया। इससे स्पष्ट हुआ कि विभिन्न सेक्टरों में निवेशकों का रुख फिलहाल एक समान नहीं है।
लार्जकैप कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता रहा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में हल्की कमजोरी दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि व्यापक बाजार में भी निवेशकों की गतिविधि संतुलित बनी हुई है और फिलहाल बड़े उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिल रहे हैं।
सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में टीसीएस, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स, सन फार्मा, इंडिगो, आईटीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, एलएंडटी और बजाज फिनसर्व के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। वहीं भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, एसबीआई, टाटा स्टील, टाइटन, भारती एयरटेल, ट्रेंट, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में शुरुआती कमजोरी देखी गई।
वैश्विक बाजारों का रुख भी मिश्रित रहा। एशियाई बाजारों में टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और सोल के प्रमुख सूचकांक दबाव में कारोबार करते दिखाई दिए, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार पिछले कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए थे। अंतरराष्ट्रीय संकेतों का असर भारतीय बाजार पर सीमित रूप से दिखाई दिया और निवेशकों ने घरेलू कारकों पर अधिक ध्यान दिया।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है, लेकिन बीच-बीच में मुनाफावसूली और सीमित दायरे का कारोबार जारी रह सकता है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना हुआ है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। कम होती तेल कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार की धारणा को आगे भी समर्थन दे सकती हैं।
