भारतीय शेयर बाजार लगातार घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और कंपनियों के प्रदर्शन से प्रभावित होता है लेकिन मौजूदा दौर में वैश्विक परिस्थितियां भी निवेशकों की रणनीति पर बड़ा असर डाल रही हैं। अमेरिका और यूरोप के बाजारों की चाल एशियाई बाजारों की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों से जुड़े संकेत भारतीय बाजार में भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर सुबह से ही ग्लोबल मार्केट के रुझानों पर रहेगी।
बाजार की दिशा तय करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों की भूमिका भी अहम रहने वाली है। यदि विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में खरीदारी बढ़ाते हैं तो बाजार को मजबूती मिल सकती है जबकि लगातार बिकवाली होने पर प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ सकता है। घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार को सहारा देने या दबाव बढ़ाने का काम कर सकती हैं। यही वजह है कि 2 सितम्बर के कारोबार में निवेशकों की नजर खरीद और बिक्री के आंकड़ों पर भी बनी रहेगी।
कच्चे तेल की कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी से भारत के आयात खर्च पर असर पड़ सकता है जबकि कीमतों में नरमी अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। इसका प्रभाव तेल और गैस कंपनियों के साथ ही एयरलाइन ट्रांसपोर्ट और अन्य सेक्टरों के शेयरों पर भी देखने को मिल सकता है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकती है।
बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा मेटल एनर्जी और एफएमसीजी सेक्टरों के शेयरों पर आज खास नजर रहने की संभावना है। अलग अलग सेक्टरों में निवेशकों की खरीदारी और मुनाफावसूली बाजार की व्यापक तस्वीर को बदल सकती है। बैंकिंग शेयरों की मजबूती सेंसेक्स और निफ्टी को सहारा दे सकती है जबकि आईटी शेयरों की चाल वैश्विक टेक्नोलॉजी सेक्टर के संकेतों पर निर्भर रह सकती है। छोटे और मझोले शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रह सकती है लेकिन यहां उतार चढ़ाव अधिक देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में निवेश करते समय केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर फैसले लेना सही रणनीति नहीं है। निवेशकों को कंपनियों की बुनियादी स्थिति सेक्टर की संभावनाओं और लंबे समय के निवेश लक्ष्यों को ध्यान में रखना चाहिए। शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए बाजार की तकनीकी स्थिति और महत्वपूर्ण स्तरों पर नजर रखना जरूरी हो सकता है।
कुल मिलाकर 2 सितम्बर का कारोबारी दिन शेयर बाजार के लिए कई संकेतों से भरा रहने वाला है। घरेलू आर्थिक मजबूती और सकारात्मक कॉरपोरेट गतिविधियां बाजार को समर्थन दे सकती हैं जबकि वैश्विक अनिश्चितता अचानक दबाव भी बना सकती है। ऐसे में निवेशकों के लिए जल्दबाजी से बचना और बाजार की बदलती परिस्थितियों को समझकर रणनीति बनाना सबसे बेहतर कदम हो सकता है। आज सेंसेक्स और निफ्टी की चाल केवल खरीदारी और बिकवाली से नहीं बल्कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के पूरे मिश्रण से तय होगी।
