बाजार की दिशा तय करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीद बिक्री महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि विदेशी निवेशकों का रुझान सकारात्मक रहता है तो सेंसेक्स और निफ्टी को मजबूती मिल सकती है। वहीं यदि वैश्विक बाजारों में कमजोरी रहती है या विदेशी निवेशक बिकवाली करते हैं तो घरेलू बाजार पर भी दबाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें अमेरिकी डॉलर की चाल और रुपये की स्थिति भी बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। यदि कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं तो इन क्षेत्रों में खरीदारी बढ़ सकती है। वहीं कमजोर परिणाम आने पर मुनाफावसूली का दबाव भी देखने को मिल सकता है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गतिविधि बनी रह सकती है लेकिन इनमें निवेश करते समय जोखिम का आकलन करना जरूरी है।
बाजार विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि केवल सोशल मीडिया या अफवाहों के आधार पर निवेश नहीं करना चाहिए। किसी भी कंपनी में निवेश से पहले उसके वित्तीय प्रदर्शन कारोबार की स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का मूल्यांकन करना आवश्यक है। जिन निवेशकों का लक्ष्य लंबी अवधि का है उन्हें बाजार में आने वाले छोटे उतार चढ़ाव से घबराने की जरूरत नहीं है। अच्छी कंपनियों में नियमित और अनुशासित निवेश भविष्य में बेहतर रिटर्न देने की संभावना रखता है।
अगर आप नए निवेशक हैं तो एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाना अधिक सुरक्षित माना जाता है। इससे बाजार में गिरावट आने की स्थिति में जोखिम कम हो सकता है। साथ ही अपने निवेश पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना भी जरूरी है ताकि किसी एक सेक्टर में कमजोरी आने पर पूरे निवेश पर बड़ा असर न पड़े।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बाजार में हर दिन तेजी या गिरावट आना सामान्य प्रक्रिया है। इसलिए भावनाओं में आकर खरीदारी या बिकवाली करने से बचना चाहिए। निवेश का निर्णय हमेशा अपनी वित्तीय क्षमता निवेश अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखकर ही लेना चाहिए। सही जानकारी धैर्य और अनुशासित रणनीति के साथ किया गया निवेश लंबे समय में बेहतर परिणाम दे सकता है।
कुल मिलाकर आज शेयर बाजार में उतार चढ़ाव के बीच चुनिंदा सेक्टरों में अवसर बन सकते हैं। ऐसे में निवेशकों को वैश्विक संकेतों कंपनियों के तिमाही नतीजों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर रखते हुए संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए। समझदारी और धैर्य के साथ लिया गया निवेश निर्णय ही भविष्य में बेहतर लाभ का आधार बन सकता है।
