इससे पहले भारतीय शेयर बाजार लगातार आठ सप्ताह की गिरावट झेल चुका था। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ऊंची बॉन्ड यील्ड महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपये जैसे कारणों ने बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव बनाया था। पिछले सप्ताह निफ्टी में करीब 3.10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी और यह लगातार आठवीं साप्ताहिक गिरावट थी। यह सिलसिला करीब 25 वर्षों में सबसे लंबा साप्ताहिक गिरावट का दौर बताया गया है।
5 अक्टूबर की तेजी में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अलग अलग सेक्टर में खरीदारी ने अहम भूमिका निभाई। बाजार खुलते समय वैश्विक संकेतों का भी असर देखने को मिला। निफ्टी शुरुआती कारोबार में 22 621.80 के स्तर तक पहुंचा लेकिन बाद में मुनाफावसूली के कारण इसमें दबाव आया। इसके बावजूद दूसरे कारोबारी सत्र में बाजार ने रिकवरी की और निफ्टी 22 500 के ऊपर बंद होने में सफल रहा।
निवेशकों के लिए 6 अक्टूबर को सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि बाजार पिछले सत्र की तेजी को आगे बढ़ा पाता है या नहीं। विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। सितंबर के अंतिम कारोबारी दिन विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 10 148.41 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 11 271.73 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड भी बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता को लेकर सामने आए संकेत भी निवेशकों के लिए अहम हैं। 5 अक्टूबर को शुरुआती तेजी के बाद बाजार में उस समय दबाव बढ़ा जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत के फिलहाल एक ठहराव पर पहुंचने की बात कही। इसके बाद सेंसेक्स और निफ्टी ने अपनी शुरुआती बढ़त का एक हिस्सा गंवा दिया था।
5 अक्टूबर के कारोबार में Tata Motors Passenger Vehicles ITC Bajaj Finance Shriram Finance और NTPC जैसे शेयर निफ्टी के प्रमुख बढ़ने वाले शेयरों में रहे। वहीं HCL Technologies Max Healthcare HDFC Bank Asian Paints और Apollo Hospitals जैसे शेयरों में दबाव देखा गया। व्यापक बाजार में भी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में करीब 0.5 प्रतिशत की बढ़त रही।
ऐसे माहौल में 6 अक्टूबर को निवेशकों के लिए बाजार में तेजी देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कंपनियों के नतीजे कारोबार की स्थिति वैश्विक संकेत और शेयर की वैल्यूएशन पर ध्यान देना जरूरी होगा। बाजार में उतार चढ़ाव अभी बना हुआ है इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर रहेगा। यह लेख निवेश सलाह नहीं है।
