नई दिल्ली। यह फैसला मुंबई में आयोजित भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की। बैठक में देश और दुनिया की आर्थिक स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई, जिसमें संभावित जोखिमों और भविष्य की वित्तीय चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। बैंक ने वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि इस वर्ष सरप्लस ट्रांसफर की स्थिति मजबूत है और इसे केंद्र सरकार को हस्तांतरित किया जा सकता है।
आरबीआई के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक की बैलेंस शीट का आकार उल्लेखनीय रूप से बढ़कर लगभग 91.97 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो सालाना आधार पर 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। इसी अवधि में बैंक की कुल आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे केंद्रीय बैंक की वित्तीय स्थिति और मजबूत हुई है।
डिविडेंड के इस बड़े निर्णय के पीछे बैंक की आय में वृद्धि और जोखिम प्रावधानों के बाद बची शुद्ध आय प्रमुख कारण रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जोखिम प्रावधान और अन्य वैधानिक फंड में हस्तांतरण से पहले शुद्ध आय में भी पिछले वर्ष की तुलना में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है, जिससे सरकार को बड़ी राशि हस्तांतरित करना संभव हुआ।
नई दिल्ली। विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई का यह कदम सरकार के लिए वित्तीय रूप से राहत देने वाला साबित हो सकता है। इस राशि का उपयोग बुनियादी ढांचे, विकास परियोजनाओं और सामाजिक कल्याण योजनाओं में किया जा सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था में निवेश और मांग दोनों को समर्थन मिलेगा।
इसके साथ ही आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि आर्थिक पूंजी ढांचे के तहत एक सुरक्षित जोखिम बफर बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित आर्थिक अनिश्चितता का सामना किया जा सके। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि पर्याप्त प्रावधानों के बाद शेष राशि को केंद्र सरकार को हस्तांतरित किया जाए।
इस ऐतिहासिक डिविडेंड के बाद सरकार की वित्तीय स्थिति को अतिरिक्त मजबूती मिलने की उम्मीद है, जो आगामी बजट और आर्थिक नीतियों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
