वाशिंगट। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि युद्ध में अमेरिका की जीत के बाद तेल और गैस की कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी। ट्रंप ने कहा कि गैस की कीमत पहले तीन डॉलर प्रति गैलन तक आ सकती है और बाद में यह दो डॉलर प्रति गैलन से भी नीचे जा सकती है। दूसरी ओर ईरान ने अपनी ऊर्जा सुविधाओं और तेल टैंकरों पर किसी भी हमले की स्थिति में अमेरिका को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने इस्राइल पर अमेरिका और ईरान के बीच शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। वहीं, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरानी शासन के अंत को अपना प्रमुख लक्ष्य बताते हुए कहा है कि तेहरान की सरकार कमजोर पड़ चुकी है।
ट्रंप का दावा- युद्ध के बाद घटेंगी तेल और गैस की कीमतें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध में जीत हासिल करने के बाद तेल की कीमतों में तेज गिरावट आएगी। उन्होंने कहा कि गैस की कीमत करीब तीन डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच सकती है और अंततः दो डॉलर प्रति गैलन से भी नीचे जाने की संभावना है।
ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा।
ईरान ने ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले की दी चेतावनी
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अमेरिका को ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर हमला करने के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान का तेल और गैस उत्पादन तंत्र व्यापक क्षेत्र में फैला हुआ है और उसकी सुरक्षा आसान नहीं है।
गालिबाफ ने कहा कि यदि ईरान की संपत्तियों को निशाना बनाया गया तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई करेगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान पहले ही इस तरह के जवाब की क्षमता प्रदर्शित कर चुका है।
यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी अधिकारियों की ओर से ईरान के तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है।
अमेरिकी अधिकारियों ने तेल टैंकरों को लेकर दी चेतावनी
अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा है कि यदि ईरान अमेरिकी जहाजों पर हमला करता है तो अमेरिका उसके तेल टैंकरों को निशाना बनाएगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान हो चुका है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने तीन ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों पर कार्रवाई का वीडियो भी साझा किया है। अमेरिकी कमांड के अनुसार, ये टैंकर ऐसे नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसके माध्यम से ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को आर्थिक मदद मिलती थी।
सेंटकॉम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि अमेरिकी जहाजों पर हमला होने की स्थिति में ईरान की तेल आपूर्ति पर और बड़ी आर्थिक कीमत थोपी जा सकती है।
एर्दोगन ने इस्राइल पर लगाया शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचाने का आरोप
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के लिए इस्राइल को जिम्मेदार ठहराते हुए उस पर शांति प्रयासों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस्राइल की कार्रवाई के कारण जून में ईरान और अमेरिका के बीच हुआ 14 सूत्री इस्लामाबाद समझौता प्रभावित हुआ।
एर्दोगन के अनुसार, युद्ध का असर केवल ईरान और खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि जब तक शांति को खतरे के रूप में देखने वाली सोच में बदलाव नहीं आता, तब तक क्षेत्रीय संकट समाप्त करना मुश्किल होगा।
बताया गया है कि प्रस्तावित समझौते में सैन्य कार्रवाई रोकने, होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, प्रतिबंधों में राहत और ईरान के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर के अमेरिकी समर्थित आर्थिक विकास कार्यक्रम जैसे प्रावधान शामिल थे।
नेतन्याहू बोले- ईरानी शासन का अंत करीब
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान की सरकार कमजोर हो चुकी है और उसके अस्तित्व पर संकट है। उन्होंने कहा कि ईरानी शासन अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है।
नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइल अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और अपने दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा। उन्होंने विरोधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें इस्राइल को आजमाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि ईरानी शासन को समाप्त करना अभी प्रमुख लक्ष्य है और इसके पूरा होने से मध्य पूर्व की स्थिति तथा क्षेत्र के लोगों का इतिहास स्थायी रूप से बदल सकता है।
