कारोबार समाप्त होने पर 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 120.83 अंक यानी 0.16 प्रतिशत गिरकर 74,781.76 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 भी 79.70 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,398.10 पर रहा। दिन के दौरान दोनों सूचकांकों ने निचले स्तर से कुछ सुधार किया, जिससे अंतिम गिरावट शुरुआती दबाव की तुलना में सीमित रही।
सेंसेक्स पिछले बंद स्तर 74,902.59 के मुकाबले 593.42 अंक यानी 0.79 प्रतिशत नीचे 74,309.16 पर खुला था। कारोबार के दौरान यह एक समय 74,917.15 के उच्च स्तर तक पहुंचा, जबकि दिन के निचले स्तर पर 74,160.16 तक फिसल गया। इस तरह सेंसेक्स ने अपने दिन के निचले स्तर से 621.59 अंक की रिकवरी की।
निफ्टी भी पिछले बंद स्तर 23,477.80 के मुकाबले 207 अंक यानी 0.88 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,270.30 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 23,448.10 के उच्च स्तर तक पहुंचा, जबकि 23,231.40 का निचला स्तर भी देखा गया।
व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.26 प्रतिशत और 0.58 प्रतिशत नीचे रहे। सेक्टरों में निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल सबसे ज्यादा कमजोर रहे। रियल्टी इंडेक्स में 2.7 प्रतिशत और मेटल इंडेक्स में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ऑटो, ऑयल एंड गैस, पीएसयू बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में भी दबाव रहा।
इसके विपरीत प्राइवेट बैंक, मीडिया और आईटी सूचकांकों में बढ़त देखने को मिली। निफ्टी 50 में एचडीएफसी बैंक, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी लाइफ और विप्रो प्रमुख बढ़त वाले शेयर रहे। वहीं हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, जेएसडब्ल्यू स्टील, आयशर मोटर्स, टाटा स्टील और ओएनजीसी में सबसे ज्यादा कमजोरी रही।
बाजार पर दबाव के प्रमुख कारणों में पश्चिम एशिया का तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली शामिल रही। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर 110 डॉलर की ओर बढ़ा, जिससे आपूर्ति बाधित होने की चिंता बढ़ी।
कच्चे तेल की महंगाई ने वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर भी दबाव बढ़ाया। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के करीब पहुंचने से इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ा और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की आशंकाएं मजबूत हुईं। इस बीच रुपया कमजोर होकर 95.6 प्रति डॉलर पर आ गया।
पूरे सप्ताह की बात करें तो निफ्टी 50 में 2.1 प्रतिशत की गिरावट रही। मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 में क्रमशः 0.3 प्रतिशत और 0.6 प्रतिशत की कमजोरी आई। प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.5 प्रतिशत चढ़ा, जबकि रियल्टी क्षेत्र कमजोर रहा।
बैंक यूनियनों की देशव्यापी हड़ताल से भी बैंकिंग गतिविधियां प्रभावित हुईं। कर्मचारी पांच दिन के कार्य सप्ताह और पीएलआई योजना में बदलाव जैसी मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे। इस महीने के अंत में और 26 अक्टूबर से भी हड़ताल प्रस्तावित है।
प्राइमरी बाजार में एनएसई के आईपीओ का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। इश्यू 17 सितंबर को खुलेगा और इससे करीब 22,662 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। अगले सप्ताह निवेशकों की नजर भारत के अगस्त सीपीआई और डब्ल्यूपीआई आंकड़ों के साथ अमेरिकी फेड के नीतिगत फैसले, रिटेल सेल्स और औद्योगिक उत्पादन पर रहेगी। क्रूड, रुपया और वैश्विक बॉन्ड यील्ड भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
