समझौते का एक महत्वपूर्ण प्रावधान न्यूजीलैंड की ओर से भारत में अगले 15 वर्षों के दौरान 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता है। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का साझा लक्ष्य तय किया है। एफटीए के प्रावधान चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे। कुछ उत्पादों पर शुल्क तत्काल समाप्त किया जाएगा, जबकि कुछ श्रेणियों में शुल्क कई वर्षों के दौरान धीरे-धीरे कम होगा। वहीं, कुछ कृषि उत्पादों के लिए कोटा और सुरक्षा उपायों को बनाए रखा गया है। भारत ने न्यूजीलैंड से आने वाले करीब 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क घटाने या समाप्त करने पर सहमति दी है। इनमें लकड़ी, ऊन, भेड़ का मांस और कच्ची खालें जैसे कुछ उत्पाद तत्काल शुल्क-मुक्त प्रवेश पाने वाली श्रेणियों में शामिल हैं।
भारतीय उपभोक्ताओं पर समझौते का सीधा असर न्यूजीलैंड से आने वाले कीवी फल, सेब और मनुका हनी जैसे उत्पादों पर पड़ सकता है। हालांकि, समझौते के तहत भारतीय बाजार को पूरी तरह नहीं खोला गया है। भारत ने कृषि क्षेत्र के कुछ संवेदनशील उत्पादों के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था रखी है। कृषि उत्पादों के मामले में टैरिफ रेट कोटा यानी टीआरक्यू व्यवस्था अपनाई गई है। इसके तहत सीमित मात्रा में उत्पादों का आयात कम शुल्क पर किया जा सकेगा, जबकि तय सीमा से अधिक आयात पर सुरक्षा उपाय लागू रहेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य बाजार पहुंच बढ़ाने के साथ घरेलू हितों के बीच संतुलन बनाए रखना है।
कीवी फल के लिए समझौते में विशेष कोटा तय किया गया है। पहले वर्ष में न्यूजीलैंड से 6,250 टन कीवी फल शुल्क-मुक्त आयात किए जा सकेंगे। यह सीमा छठे वर्ष तक बढ़कर 15,000 टन हो जाएगी। हालांकि, इसके लिए न्यूनतम आयात मूल्य और मौसमी शर्तें लागू रहेंगी। सेब के लिए भी कोटा व्यवस्था रखी गई है। इन पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा, जो मौजूदा 50 प्रतिशत शुल्क का आधा है। सेब के आयात पर भी न्यूनतम आयात मूल्य और मौसमी शर्तें लागू होंगी। इससे भारतीय फल उत्पादकों पर कम कीमत वाले आयात के संभावित प्रभाव को सीमित रखने का प्रयास किया गया है।
समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू भारत के संवेदनशील डेयरी क्षेत्र को कम शुल्क वाले आयात के लिए नहीं खोलना है। सरकार ने करोड़ों छोटे किसानों और पशुपालकों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए डेयरी समेत कई कृषि उत्पादों को एफटीए के दायरे से बाहर रखा है। इस तरह समझौते में भारतीय निर्यातकों के लिए न्यूजीलैंड के बाजार तक पहुंच बढ़ाने के साथ घरेलू कृषि और डेयरी क्षेत्र के संवेदनशील हितों के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी बनाए रखी गई है। 20 अक्टूबर से समझौता लागू होने के बाद इसके अलग-अलग प्रावधान तय चरणों के अनुसार प्रभावी होंगे।
