आयकर विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि 31 जुलाई तक 5.9 करोड़ से ज्यादा आईटीआर दाखिल हुए हैं। विभाग ने करदाताओं के विश्वास और समय पर अनुपालन को भारत की विकास यात्रा को गति देने वाला कदम बताया।
आंकड़ों के मुताबिक, आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तारीख यानी 31 जुलाई को ही 40 लाख से ज्यादा रिटर्न जमा किए गए। यह तारीख उन व्यक्तिगत करदाताओं और ऐसी संस्थाओं के लिए निर्धारित थी, जिन्हें अपने खातों का अनिवार्य ऑडिट नहीं कराना होता है।
अंतिम दिनों में तेजी से बढ़ी रिटर्न फाइलिंग की रफ्तार
इस साल आईटीआर दाखिल करने की रफ्तार अंतिम कुछ हफ्तों में काफी तेज रही। आयकर विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 11 जुलाई तक 1.7 करोड़ से अधिक रिटर्न दाखिल हो चुके थे। इसके बाद 22 जुलाई तक यह संख्या बढ़कर 3 करोड़ के पार पहुंच गई।
27 जुलाई तक 4 करोड़ से ज्यादा आईटीआर दाखिल किए गए, जबकि 31 जुलाई को यह आंकड़ा तेजी से बढ़ते हुए 5 करोड़ के पार पहुंच गया। दिन खत्म होने से पहले रिटर्न की संख्या 5.5 करोड़ से ज्यादा हो गई और आखिरकार यह आंकड़ा 5.9 करोड़ के स्तर को पार कर गया।
करदाताओं से पहले ही रिटर्न दाखिल करने की अपील
आयकर विभाग लगातार करदाताओं से अपील करता रहा कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और समय रहते अपना रिटर्न दाखिल कर दें। विभाग का कहना था कि आखिरी समय में ई-फाइलिंग पोर्टल पर अधिक ट्रैफिक के कारण तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। समय पर रिटर्न दाखिल करने से करदाताओं को जुर्माने और अन्य परेशानियों से बचने में मदद मिलती है। साथ ही, टैक्स व्यवस्था भी अधिक सुचारू रूप से संचालित होती है।
आईटीआर फॉर्म में किए गए बदलाव
आकलन वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने संशोधित आईटीआर फॉर्म जारी किए थे। इनमें दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ, शेयर बायबैक से होने वाले नुकसान, कुछ ट्रेडिंग लेनदेन और अन्य वित्तीय जानकारियों के खुलासे से जुड़े नए प्रावधान शामिल किए गए हैं।
इन बदलावों का उद्देश्य टैक्स प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और करदाताओं के लिए अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाना है। नए प्रावधानों के जरिए आय और निवेश से जुड़ी जानकारियों को अधिक स्पष्ट तरीके से दर्ज किया जा सकेगा।
पिछले साल भी बढ़ा था टैक्स अनुपालन
पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में भी आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में बड़ा इजाफा देखने को मिला था। उस दौरान 9 करोड़ से अधिक करदाताओं ने अपना आईटीआर दाखिल किया था। इसी अवधि में आयकर विभाग ने 4.35 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का टैक्स रिफंड जारी किया था। यह आंकड़ा देश में प्रत्यक्ष कर व्यवस्था के बढ़ते विस्तार और आयकर विभाग की कार्यक्षमता को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती आईटीआर फाइलिंग से देश में टैक्स अनुपालन की संस्कृति मजबूत हो रही है। डिजिटल माध्यम से आसान हुई प्रक्रिया और आयकर विभाग की ऑनलाइन सेवाओं ने भी करदाताओं को समय पर रिटर्न दाखिल करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
