मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने के अगस्त 2026 डिलीवरी वाले वायदा अनुबंध की शुरुआत पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले हल्की कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार के दौरान कीमतों में लगातार गिरावट बनी रही और सोना दिन के शुरुआती घंटों में एक हजार रुपये से अधिक सस्ता होकर कारोबार करता दिखाई दिया। कारोबार के दौरान सोने ने दिन का निचला स्तर भी छुआ, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बाजार में खरीदारी की तुलना में बिकवाली का दबाव अधिक बना हुआ है।
चांदी के वायदा कारोबार में भी इसी तरह का रुख देखने को मिला। सितंबर 2026 डिलीवरी वाले अनुबंध की शुरुआत गिरावट के साथ हुई और शुरुआती कारोबार के दौरान इसमें और अधिक कमजोरी दर्ज की गई। कारोबार के पहले कुछ घंटों में चांदी एक प्रतिशत से अधिक टूट गई। दिन के दौरान इसके भाव लगातार दबाव में बने रहे, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का झुकाव फिलहाल सुरक्षित मुनाफावसूली की ओर है।
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में भी सोना और चांदी दोनों दबाव में रहे। वैश्विक स्तर पर कीमती धातुओं में आई बिकवाली का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में बदलाव और डॉलर से जुड़े संकेतों का प्रभाव कीमती धातुओं की कीमतों पर लगातार बना हुआ है। ऐसे माहौल में निवेशक नए आर्थिक संकेतों और केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों पर भी नजर बनाए हुए हैं।
हालांकि कीमतों में गिरावट के बावजूद सोने की मांग से जुड़ा एक अलग रुझान भी सामने आया है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से जून तिमाही के दौरान गोल्ड लोन का दायरा उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। हालिया आकलनों के अनुसार, गोल्ड लोन अब सुरक्षित ऋण श्रेणी में सबसे बड़ा एसेट क्लास बनकर उभरा है और इसने वाहन ऋण को भी पीछे छोड़ दिया है। यह संकेत देता है कि आर्थिक जरूरतों के समय लोग सोने को वित्तीय सुरक्षा के प्रभावी साधन के रूप में अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कीमती धातुओं में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। निवेशकों को केवल दैनिक मूल्य परिवर्तन के आधार पर निर्णय लेने के बजाय वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, ब्याज दरों के रुझान, मुद्रा बाजार की चाल और घरेलू मांग जैसे व्यापक कारकों पर भी ध्यान देना चाहिए। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दबाव बना रहता है तो निकट भविष्य में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वहीं, घरेलू मांग और निवेशकों की खरीदारी की रणनीति आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
