यह पहल राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता का ग्रैंड फिनाले 1 अगस्त को आयोजित होगा, जहां चयनित प्रतिभागी अपने नवाचारी विचार और समाधान विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। शिक्षा, उद्योग, डिजाइन, प्रौद्योगिकी और हथकरघा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ इन प्रस्तावों का मूल्यांकन करेंगे और सबसे प्रभावी समाधानों का चयन करेंगे।
हैकाथॉन का मुख्य उद्देश्य युवाओं की रचनात्मक सोच को देश की पारंपरिक बुनाई कला से जोड़ना है। सरकार चाहती है कि आधुनिक तकनीकी ज्ञान और पारंपरिक शिल्प कौशल के मेल से ऐसे समाधान विकसित हों, जो हथकरघा क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत कर सकें। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने, उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और वैश्विक बाजार में भारतीय हथकरघा उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
इस प्रतियोगिता में वस्त्र, फैशन, डिजाइन, इंजीनियरिंग, प्रबंधन और प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न विषयों के विद्यार्थी भाग ले सकेंगे। इसके अलावा हथकरघा बुनकर, कारीगर, शोधकर्ता, स्टार्टअप, उद्यमी, नवाचारकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवर भी इसमें अपने विचार प्रस्तुत कर सकते हैं। इस तरह यह मंच पारंपरिक अनुभव और आधुनिक तकनीकी दृष्टिकोण को एक साथ लाने का अवसर प्रदान करेगा।
प्रतियोगिता के लिए कई महत्वपूर्ण विषय निर्धारित किए गए हैं। इनमें उत्पाद एवं डिजाइन नवाचार, टिकाऊ विकास, सर्कुलर इकोनॉमी, डिजिटल तकनीक का उपयोग, बाजार तक पहुंच, ब्रांडिंग, आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता, उत्पादकता में वृद्धि, व्यवसाय विकास और सामाजिक प्रभाव जैसे क्षेत्र शामिल हैं। सरकार को उम्मीद है कि इन विषयों पर प्रस्तुत होने वाले नए विचार हथकरघा उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया निर्धारित अवधि तक खुली रहेगी, जिसके दौरान इच्छुक प्रतिभागी अपने विचार और परियोजनाएं प्रस्तुत कर सकेंगे। चयनित प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए विशेषज्ञों की ओर से मार्गदर्शन, मेंटरशिप और आवश्यकता पड़ने पर इनक्यूबेशन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे नवाचारों को व्यावसायिक रूप देने और उन्हें व्यवहार में लागू करने का मार्ग आसान होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का हथकरघा क्षेत्र न केवल लाखों लोगों की आजीविका का आधार है, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में यदि इस क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, डिजिटल समाधान और नवाचार से जोड़ा जाता है तो इससे रोजगार, निर्यात और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल सकती है।
सरकार की यह पहल पारंपरिक शिल्प और आधुनिक नवाचार के बीच मजबूत साझेदारी स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे हथकरघा उद्योग को नई पहचान मिलने के साथ-साथ देश के नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी पारंपरिक उद्योगों के साथ जुड़कर नए अवसर प्राप्त होने की उम्मीद है।
