नई दिल्ली ।सितंबर 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में बड़ी बिकवाली की। महीने के दौरान उन्होंने कुल 45,536 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर बेचे। हालांकि, प्राथमिक बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही और उन्होंने सितंबर में 9,676 करोड़ रुपये का निवेश किया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की बढ़ती बिकवाली के पीछे अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 5.2 प्रतिशत से ऊपर पहुंचना और कच्चे तेल की कीमतों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंका प्रमुख कारण रही।
विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार विदेशी बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया है। इसी दबाव के बीच बाजार लगातार आठ सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। इस दौरान 13 प्रतिशत कम बारिश वाले कमजोर मानसून ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि, बाजार में हालिया करेक्शन के बाद बड़ी कंपनियों यानी लार्ज-कैप शेयरों के वैल्यूएशन पहले की तुलना में अधिक आकर्षक दिखाई देने लगे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्ता वाली बड़ी कंपनियों के शेयरों में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बन सकते हैं।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली में ठहराव या उनके दोबारा खरीदारी की ओर लौटने के लिए कुछ सकारात्मक संकेतों की जरूरत होगी। इनमें कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जुलाई और अगस्त में कच्चे तेल की कीमतों में संभावित गिरावट की उम्मीद के कारण एफपीआई का रुख कुछ सकारात्मक हुआ था, लेकिन यह बदलाव ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सका। 28 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच केवल चार कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने करीब 34,965 करोड़ रुपये की अस्थायी इक्विटी बिकवाली की, जबकि इसी अवधि के लिए निर्धारित इक्विटी बिकवाली 27,962 करोड़ रुपये रही। इससे महीने के अंत और अक्टूबर की शुरुआत में विदेशी निकासी तेज होने का संकेत मिला।
बाजार रणनीतिकारों के अनुसार, द्वितीयक बाजार में बिकवाली और प्राथमिक बाजार में निवेश का अंतर यह दर्शाता है कि विदेशी निवेशक भारत से पूरी तरह बाहर नहीं जा रहे हैं। वे निवेश के अवसरों का चयन पहले की तुलना में अधिक सावधानी से कर रहे हैं। यह रुझान अक्टूबर में भी जारी रहने की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई ने बाजार को मजबूत सहारा दिया। सितंबर 2026 में डीआईआई ने नकद इक्विटी बाजार में 76,030 करोड़ रुपये की खरीदारी की। घरेलू संस्थागत और खुदरा निवेशकों की लगातार खरीदारी ने विदेशी बिकवाली के दबाव को काफी हद तक संतुलित किया।
आगे बाजार की दिशा वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों से भी प्रभावित होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, जिन कंपनियों के परिणाम उम्मीद से बेहतर रहेंगे और जिनका प्रबंधन भविष्य को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण पेश करेगा, उनके शेयरों में निवेशकों की खरीदारी बढ़ सकती है। ऐसे में विदेशी निवेशकों की गतिविधि, घरेलू संस्थागत निवेश, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कंपनियों के दूसरी तिमाही के प्रदर्शन पर बाजार की नजर बनी रहेगी।
