देश में इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी वर्तमान में अभी सीमित स्तर पर है, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि वित्त वर्ष 2035 तक यह आंकड़ा लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में सार्वजनिक परिवहन का स्वरूप पूरी तरह से बदल सकता है। इसी अवधि में यह भी संभावना जताई गई है कि सार्वजनिक परिवहन में चलने वाली कुल बसों में इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत से अधिक तक पहुंच सकती है, जो एक ऐतिहासिक बदलाव होगा।
भारत में बसें सार्वजनिक परिवहन का सबसे बड़ा माध्यम हैं और लाखों लोग रोजाना इसी पर निर्भर रहते हैं। कुल यात्रियों की यात्रा दूरी का एक बड़ा हिस्सा बसों के माध्यम से तय होता है, ऐसे में इस क्षेत्र का इलेक्ट्रिफिकेशन न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि यह शहरी प्रदूषण और ईंधन निर्भरता को भी काफी हद तक कम कर सकता है।
इस बदलाव के पीछे कई प्रमुख कारण सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ा कारण सरकारी स्तर पर बढ़ते निवेश और खरीद योजनाएं हैं, जिनके तहत इलेक्ट्रिक बसों की खरीद को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और तकनीकी सुधार भी इस सेक्टर को मजबूती दे रहे हैं। धीरे-धीरे निजी क्षेत्र की भागीदारी भी इस दिशा में बढ़ रही है, जिससे इस मॉडल को और गति मिल रही है।
वर्तमान समय में देश के विभिन्न हिस्सों में हजारों इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर चल रही हैं और कई नए ऑर्डर और योजनाएं पाइपलाइन में हैं। हालांकि इस क्षेत्र में अभी भी कुछ चुनौतियां मौजूद हैं, जैसे चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता, बैटरी तकनीक की लागत और संचालन की दक्षता। इसके बावजूद इस सेक्टर में विकास की गति लगातार बनी हुई है।
आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाने, वित्तीय मॉडल को मजबूत करने और चार्जिंग नेटवर्क को व्यापक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे न केवल इलेक्ट्रिक बसों की लागत कम होगी, बल्कि उनका संचालन भी अधिक आसान और प्रभावी बन सकेगा।
कुल मिलाकर देखा जाए तो भारत में इलेक्ट्रिक बसों का बढ़ता उपयोग केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यह देश के परिवहन तंत्र को अधिक स्वच्छ, आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि यह गति इसी तरह बनी रही, तो आने वाले दशक में भारत का सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह से हरित ऊर्जा आधारित प्रणाली की ओर बढ़ सकता है।
