झांसी (प्रेमनगर)। जीवन की शतकीय पारी पार कर चुकीं गुलों अम्मा पत्नी स्व. सन्नी, निवासी कस्तूरबा स्कूल के पास नगरा प्रेमनगर, अपने ही बेटे शहजाद से परेशान होकर थाना प्रेमनगर पहुंचीं।
थाने में मौजूद मिशन शक्ति की पुलिस टीम और प्रभारी निरीक्षक तुलसीराम पाण्डेय ने अम्मा की समस्या को गंभीरता से सुना। उस समय अम्मा भूखी थीं और उन्हें चक्कर आ रहे थे। पुलिस की ‘दीदियों’ ने तुरंत उन्हें चाय-बिस्किट और पानी दिया। साथ ही डॉक्टर को बुलाकर उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया और दवा भी दिलवाई। इसके बाद उनकी समस्या के समाधान के लिए तत्काल पुलिस सहायता भी भेजी गई। अम्मा ने भावुक होकर पुलिस और डॉक्टर को दिल से आशीर्वाद दिया तथा उनकी सलामती के लिए दुआ की।
अम्मा ने इस दौरान सामाजिक सौहार्द का एक मार्मिक उदाहरण भी साझा किया। उन्होंने बताया कि देश की आजादी के समय उन्होंने भी अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में भाग लिया था, लेकिन आज उनका अपना बेटा ही उन्हें घर से निकाल चुका है।
उन्होंने अपने मुंह बोले भाई रामदीन चौबे को याद करते हुए कहा कि वह उन्हें बहन मानते थे और हर साल राखी बंधवाते थे। बदले में उन्होंने अम्मा को खेती के लिए जमीन दी और रहने के लिए घर बनवाया। साथ ही मंदिर और धर्मशाला का निर्माण भी कराया, जहां अम्मा नियमित रूप से जाती थीं।
अम्मा ने भावुक होकर कहा कि यदि रामदीन चौबे आज जीवित होते तो उन्हें दर-दर भटकना नहीं पड़ता। उन्होंने उनके लिए दुआ करते हुए कहा कि खुदा उन्हें जन्नत नसीब करे। यह घटना आज के समाज में भाईचारे और मानवता की मिसाल पेश करती है।
