संशोधित दरों के तहत डीजल के निर्यात पर शुल्क 8.50 रुपये से बढ़ाकर 11.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसमें तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। इसी तरह, एटीएफ के निर्यात पर शुल्क 10.50 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इस तरह विमान ईंधन पर निर्यात शुल्क में 50 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। पेट्रोल पर शुल्क शून्य होने के साथ तीनों पेट्रोलियम उत्पादों के लिए अलग-अलग दरें लागू हो गई हैं।
सरकार ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बने हालात के बीच इन शुल्कों की समीक्षा की है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने के बाद मार्च के अंत में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर शुल्क लागू किए गए थे। इन दरों की समीक्षा केंद्र सरकार हर 15 दिन में करती है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों के अनुसार शुल्कों में बदलाव किया जा सके।
निर्यात शुल्क लागू करने का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तेल रिफाइनरियां घरेलू बाजार में आपूर्ति करने के बजाय अधिक मुनाफे के लिए विदेशी बाजारों को प्राथमिकता न दें। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें घरेलू बाजार की तुलना में अधिक आकर्षक होती हैं, तब निर्यात से बेहतर कमाई की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे हालात में निर्यात शुल्क के माध्यम से घरेलू खरीदारों के लिए पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश की जाती है।
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 113.10 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। बीते एक सप्ताह में इसकी कीमत में 1.55 प्रतिशत और एक महीने के दौरान 15.71 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले तीन महीनों में ब्रेंट क्रूड करीब 26 प्रतिशत महंगा हुआ है।
भारत के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व भी काफी अधिक है। मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने से पहले देश के कच्चे तेल के आयात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर आता था। यह मार्ग फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है और तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए दूसरे विकल्प तलाशने पड़े हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति से जुड़े इन घटनाक्रमों के बीच सरकार पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात शुल्क की समीक्षा कर रही है। नई दरों के तहत पेट्रोल पर निर्यात शुल्क समाप्त हो गया है, जबकि डीजल और एटीएफ पर शुल्क बढ़ाया गया है। इन बदलावों का उद्देश्य घरेलू आपूर्ति और निर्यात से जुड़े आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखना है।
