उज्जैन मध्य प्रदेश के उज्जैन में दशहरे पर होने वाले रावण दहन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने रावण दहन आयोजित करने वाली चार समितियों को वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजकर सात दिन के भीतर जवाब मांगा है। समाज ने आयोजकों से सवाल किया है कि आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण वध होने का उल्लेख किस धर्मशास्त्र या पुराण में मिलता है। नोटिस में कहा गया है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक प्रमाण नहीं दिया गया तो वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले के सामने आने के बाद शहर में दशहरा उत्सव से पहले धार्मिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।उज्जैन ।
जानकारी के मुताबिक 20 अक्टूबर को दशहरा पर्व के अवसर पर उज्जैन में विभिन्न स्थानों पर रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। इससे पहले अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने इस पर आपत्ति जताते हुए संबंधित आयोजक समितियों को नोटिस जारी कराया है। महाकाल मंदिर के पुजारी और संगठन के संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी ने अधिवक्ता अश्विन चौधरी के माध्यम से यह नोटिस भिजवाया है। जिन चार समितियों को नोटिस भेजा गया है उनमें लाला ओम अमरनाथ खत्री दशहरा उत्सव समिति कार्तिक मेला दशहरा उत्सव समिति सिद्धवट दशहरा समिति और शास्त्री नगर दशहरा उत्सव समिति शामिल हैं।
नोटिस में आयोजकों से कहा गया है कि वे स्पष्ट करें कि आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण वध किए जाने का उल्लेख किस धार्मिक ग्रंथ में मौजूद है। समाज ने संबंधित समितियों से इस तिथि पर रावण दहन नहीं करने का अनुरोध भी किया है। नोटिस के अनुसार सात दिन के भीतर शास्त्रीय आधार स्पष्ट नहीं किया गया तो आगे कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी गई है। इसमें संभावित कार्रवाई से जुड़े हर्जे और खर्च की जिम्मेदारी भी आयोजक समितियों पर डालने की बात कही गई है। हालांकि इस मामले में आयोजक समितियों का पक्ष सामने आने के बाद ही उनकी प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी का कहना है कि रावण दहन के नाम पर ब्राह्मण समाज का अपमान नहीं होना चाहिए। उनका आरोप है कि देश के कई हिस्सों में रावण दहन की परंपरा के दौरान ब्राह्मण समुदाय की भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने आयोजक समितियों से सवाल किया कि यदि रावण दहन धार्मिक परंपरा का हिस्सा है तो उसके समर्थन में शास्त्रीय प्रमाण सार्वजनिक किए जाने चाहिए। महेश पुजारी का कहना है कि रावण के चरित्र और उससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं पर चर्चा करते समय किसी समुदाय का अपमान नहीं किया जाना चाहिए।
महेश पुजारी ने यह भी कहा कि अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज देश की विभिन्न संस्थाओं से रावण दहन बंद करने का अनुरोध कर रहा है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए ब्राह्मणों की शिखा और यज्ञोपवीत के अपमान की घटनाओं पर भी अपनी बात रखी। संगठन की मांग है कि धार्मिक आयोजनों में किसी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधियों से बचा जाए।
फिलहाल उज्जैन में दशहरे से पहले रावण दहन का मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर आयोजन समितियों की तैयारियां जारी हैं तो दूसरी ओर युवा ब्राह्मण समाज ने शास्त्रीय प्रमाण और जवाबदेही की मांग उठाई है। अब सात दिन की समयसीमा में समितियां क्या जवाब देती हैं और इस विवाद पर प्रशासन या आयोजकों की ओर से क्या रुख सामने आता है इस पर सबकी नजर रहेगी।
