भोपाल। मध्य प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए परिवहन सुविधा से जुड़ा बड़ा बदलाव हो सकता है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इन विद्यालयों में संचालित बस सेवा के लिए किराया निर्धारित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव पर 12 अक्टूबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में चर्चा के बाद मंजूरी मिलने की संभावना जताई जा रही है। यदि सरकार प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो अब तक मुफ्त बस सेवा का लाभ ले रहे बच्चों के अभिभावकों को आने वाले समय में किराया देना पड़ सकता है। इससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है।
विभाग के प्रस्ताव के मुताबिक जिले में संचालित सांदीपनि विद्यालयों की बसों का किराया निर्धारित करने की जिम्मेदारी कलेक्टरों को दी जा सकती है। कलेक्टर अपने जिले की परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किराया तय कर सकेंगे। इसके बाद अभिभावकों से निर्धारित शुल्क वसूलने की व्यवस्था लागू की जा सकती है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किराया कितना होगा और इसे सभी विद्यार्थियों पर लागू किया जाएगा या कुछ विशेष श्रेणियों के बच्चों को इससे छूट मिलेगी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राहत का कोई प्रावधान होगा या नहीं इस पर भी स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
प्रदेश में वर्तमान में 370 सांदीपनि विद्यालयों में बच्चों को बसों के जरिए घर से स्कूल लाने और स्कूल से घर पहुंचाने की व्यवस्था संचालित है। इस सुविधा का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूल आने-जाने में मदद देना और उनकी पढ़ाई को सुगम बनाना है। अब सरकार इस व्यवस्था पर होने वाले खर्च की भरपाई के लिए मौजूदा नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रही है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नई व्यवस्था किस तरह लागू होगी और अभिभावकों को कितना भुगतान करना पड़ेगा।
इस प्रस्ताव के बीच बसों की उपलब्धता का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। जानकारी के अनुसार प्रदेश के 19 जिलों में सांदीपनि विद्यालयों के करीब डेढ़ लाख बच्चों को बस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई विद्यालयों में बसें उपलब्ध नहीं होने के कारण विद्यार्थी इस सुविधा से वंचित हैं। ऐसे में सरकार के सामने केवल किराया तय करने का ही नहीं बल्कि सभी पात्र बच्चों तक परिवहन सुविधा पहुंचाने का सवाल भी है। अभिभावकों के लिए यह जानना जरूरी होगा कि जिन स्कूलों में अभी बसें उपलब्ध नहीं हैं वहां पहले परिवहन व्यवस्था शुरू की जाएगी या नई शुल्क व्यवस्था लागू करने पर प्राथमिकता दी जाएगी।
यदि प्रस्ताव मंजूर होता है तो इसके क्रियान्वयन से जुड़े नियम और शर्तें भी अहम होंगी। अभिभावकों को राहत देने के लिए जरूरतमंद परिवारों को छूट मिलेगी या नहीं और बस सेवा की गुणवत्ता तथा उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे इस पर फैसले के बाद स्थिति साफ हो सकती है। फिलहाल सभी की नजर कैबिनेट के निर्णय पर है।
इसके अलावा बैठक में मैहर पांढुर्णा निवाड़ी और मऊगंज जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यालय खोलने तथा जिला स्तर पर पद सृजित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा सकता है। साथ ही 17 सितंबर से शुरू हुए सेवा संकल्प अभियान की प्रगति और अब तक किए गए कार्यों की समीक्षा भी मुख्यमंत्री मंत्रियों के साथ कर सकते हैं। कैबिनेट के फैसलों से प्रदेश में शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।
