मुख्यमंत्री योगी ने जापान की पूर्व प्रथम महिला और शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे के साथ कॉरिडोर का अनावरण किया। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता, प्रधानमंत्री मोदी और 140 करोड़ भारतीयों की ओर से शिंजो आबे को श्रद्धांजलि बताया। योगी ने कहा कि जापान ने काशी को रुद्राक्ष दिया और अब काशी उसी रुद्राक्ष में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री की स्मृति को स्थायी रूप से संजो रही है।
योगी ने दोनों नेताओं की पहली मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2007 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते प्रधानमंत्री मोदी जापान गए थे, जहां उनकी शिंजो आबे से पहली मुलाकात हुई। उसी साल आबे ने भारत की संसद में भारत और जापान की मजबूती को एक-दूसरे के हित से जोड़ा था। वर्ष 2014 में काशी-क्योटो पार्टनर सिटी समझौता हुआ और 2015 में शिंजो आबे ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ काशी में गंगा आरती में हिस्सा लिया। 2017 में दोनों नेताओं ने अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन परियोजना का शिलान्यास किया, जबकि 2018 में आबे ने प्रधानमंत्री मोदी को यामानाशी स्थित अपने निजी आवास पर आमंत्रित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब दो नेताओं की मित्रता दो देशों के विश्वास में बदलती है तो उसके व्यापक प्रभाव होते हैं। उन्होंने बताया कि 2021 में शिंजो आबे को भारत के प्रमुख नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री मोदी अपने मित्र को अंतिम विदाई देने टोक्यो पहुंचे और भारत में राष्ट्रीय शोक रखा गया। योगी ने इसे प्रोटोकॉल के बजाय व्यक्तिगत रिश्ते से जुड़ा कदम बताया।
उन्होंने भारत-जापान संबंधों को विश्वास पर आधारित बताते हुए कहा कि करीब 1400 जापानी कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। दोनों देशों का सहयोग अब सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। उनके अनुसार जापान के पास तकनीक और अनुभव है, जबकि भारत के पास प्रतिभा और युवा ऊर्जा है।
योगी ने इसी वर्ष फरवरी में अपनी जापान यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि टोक्यो और यामानाशी में जापानी कंपनियों के साथ हजारों करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए। उन्होंने जापान में मैग्लेव ट्रेन की प्रिसिजन इंजीनियरिंग को करीब से देखने की बात कही। यामानाशी को उत्तर प्रदेश का ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी पार्टनर बताया गया। उन्होंने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ईडा क्षेत्र में 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित की जा रही है और इन्वेस्ट यूपी में यामानाशी डेस्क भी बनाई गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान के पास प्रिसिजन है तो उत्तर प्रदेश के पास बड़े स्तर पर काम करने की क्षमता, 25 करोड़ लोगों का बाजार, देश का सबसे युवा वर्कफोर्स और एक्सप्रेसवे तथा एयरपोर्ट का बड़ा नेटवर्क है। उन्होंने बताया कि 2027 में भारत-जापान राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे और आबे मेमोरियल कॉरिडोर इस अवसर की शुरुआती भेंट है। उन्होंने काशी और क्योटो को अपनी-अपनी सभ्यताओं की आत्मा बताते हुए कहा कि दोनों शहर विरासत के संरक्षण के साथ विकास का संदेश देते हैं।
योगी ने कॉरिडोर को नई पीढ़ी के लिए जीवंत क्लासरूम बताया। अकी आबे ने शिंजो आबे और प्रधानमंत्री मोदी के आत्मीय संबंधों को याद किया और कहा कि 2015 में काशी आने के बाद उनके पति उनसे गंगा आरती और वाराणसी की यादें साझा करते थे। उन्होंने कहा कि आबे जीवित होते तो अपने नाम पर बने स्मारक को देखकर खुश होते। अकी आबे ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की बाहरी दीवारों पर लगे 108 रुद्राक्षों की भी प्रशंसा की और बताया कि जापान में भी 108 संख्या का विशेष महत्व है।
