शहबाज शरीफ ने प्रदर्शनकारियों से लॉन्ग मार्च और धरना खत्म करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन खत्म करने के बाद सरकार उनके साथ बैठकर बातचीत करने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री का यह रुख इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे एक दिन पहले ही सरकार ने इमरान समर्थकों के साथ बातचीत से इनकार कर दिया था। हालांकि, सरकार की ओर से बातचीत की पेशकश किए जाने के बाद भी प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
इमरान खान के समर्थकों ने प्रधानमंत्री की बातचीत की पेशकश ठुकरा दी है। उनका कहना है कि वे इमरान खान की रिहाई की मांग से पीछे नहीं हटेंगे। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग पूर्व प्रधानमंत्री को जेल से रिहा करना है। उनका मार्च खैबर पख्तूनख्वा से आगे बढ़ते हुए राजधानी की ओर जा रहा है। इस बीच सरकार के सामने प्रदर्शन को नियंत्रित करने और राजधानी तक इसके पहुंचने से रोकने की चुनौती बनी हुई है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने प्रदर्शन को लेकर चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आंदोलन से देश की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयास प्रभावित हो सकते हैं। उनके मुताबिक सरकार पिछले ढाई साल से अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए काम कर रही है और इसमें बाधा डालने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा और लोगों की जान तथा संपत्ति की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है।
राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर इमरान समर्थकों का मार्च पंजाब प्रांत तक पहुंचता है और उसे वहां अधिक जनसमर्थन मिलता है, तो शहबाज सरकार पर दबाव और बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में प्रदर्शन को नियंत्रित करना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इमरान खान की राजनीतिक लोकप्रियता को देखते हुए उनके समर्थकों की बढ़ती संख्या पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर असर डाल सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम में सेना प्रमुख असीम मुनीर की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हो रही हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इमरान खान के समर्थकों के आंदोलन के जरिए शहबाज शरीफ सरकार पर दबाव बन सकता है। उनके अनुसार, यदि सरकार प्रदर्शन को रोकने में कमजोर दिखाई देती है तो इससे प्रधानमंत्री की राजनीतिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। हालांकि, शहबाज शरीफ के सत्ता से हटने को लेकर किए जा रहे दावे फिलहाल राजनीतिक विश्लेषण और अटकलों पर आधारित हैं।
फिलहाल इमरान खान के समर्थकों का लॉन्ग मार्च इस्लामाबाद की ओर बढ़ रहा है और सरकार ने बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिश की है। दूसरी ओर प्रदर्शनकारी इमरान की रिहाई की मांग पर कायम हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में मार्च की दिशा, उसे मिलने वाला समर्थन और सरकार की प्रतिक्रिया पाकिस्तान के राजनीतिक घटनाक्रम के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
