गृह मंत्रालय के अनुसार, गिरफ्तार किए गए अधिकारियों में से एक वर्तमान में मंत्रालय के विदेशी प्रभाग में तैनात था। दूसरा अधिकारी फिलहाल वेतन एवं लेखा कार्यालय में कार्यरत था और इससे पहले विदेशी प्रभाग में सेवाएं दे चुका है। शुरुआती पूछताछ में दोनों के कुछ संस्थाओं के संपर्क में रहने और एफसीआरए पंजीकरण तथा लाइसेंस के नवीनीकरण में मदद करने के बदले कथित तौर पर पैसे मांगने की जानकारी सामने आई है।
मामला सामने आने के बाद एफसीआरए से जुड़ी सेवाओं की प्रक्रिया को लेकर भी लोगों को सावधान किया गया है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एफसीआरए से संबंधित सेवाएं ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं। किसी भी मध्यस्थ, एजेंट या निजी व्यक्ति को इन सेवाओं में मदद करने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है।
मामले की जांच अभी जारी है। आरोपों की पुष्टि अदालत में होना बाकी है। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इस कार्रवाई के बीच मंत्रालय ने भ्रष्टाचार के प्रति सख्त रुख दोहराते हुए एफसीआरए सेवाओं से जुड़े मामलों में किसी अनधिकृत व्यक्ति के माध्यम से काम कराने से बचने की बात कही है।
एफसीआरए के तहत विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए पंजीकरण जरूरी होता है। विदेशी फंडिंग से संबंधित गतिविधियों की निगरानी के लिए गृह मंत्रालय नोडल प्राधिकरण के रूप में काम करता है। इसी व्यवस्था के तहत पंजीकरण, नवीनीकरण और अन्य नियामकीय प्रक्रियाएं संचालित की जाती हैं।
इसी बीच विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर संसद की संयुक्त समिति की बैठक भी हुई। 31 सदस्यीय समिति प्रस्तावित संशोधनों की विस्तृत जांच कर रही है। 29 सितंबर की बैठक में गृह और कानून मंत्रालय के अधिकारियों ने विधेयक के प्रावधानों और 2010 के मूल कानून में बदलाव की जरूरत को लेकर समिति के सामने जानकारी रखी।
यह विधेयक 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और बाद में दोनों सदनों की मंजूरी के बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया। समिति प्रस्तावित बदलावों की विभिन्न कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं से जांच कर रही है। विधेयक अभी संसद की समिति के विचाराधीन है और कानून नहीं बना है।
प्रस्तावित संशोधनों में ऐसे संगठनों से जुड़े विदेशी अंशदान और संपत्तियों के प्रबंधन से संबंधित प्रावधान शामिल हैं, जिनका एफसीआरए प्रमाणपत्र समाप्त हो जाता है, रद्द कर दिया जाता है या जिसका नवीनीकरण नहीं हो पाता। समिति इन प्रावधानों पर विभिन्न पक्षों और विशेषज्ञों के विचार भी सुन रही है।
एफसीआरए से जुड़े मौजूदा रिश्वत मामले और प्रस्तावित संशोधन विधेयक की संसदीय जांच अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। एक तरफ दो अधिकारियों पर मौजूदा पंजीकरण प्रक्रिया में कथित तौर पर रिश्वत मांगने के आरोपों की जांच चल रही है, वहीं दूसरी तरफ संसद की समिति विदेशी अंशदान से जुड़े कानून में प्रस्तावित बदलावों की समीक्षा कर रही है।
मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि गिरफ्तार अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं और एफसीआरए सेवाओं को लेकर अनधिकृत बिचौलियों से सावधान रहने की अपील की गई है।
